ऑस्ट्रेलिया सरकार ने देश में रह रहे भारतीयों, खासकर पंजाबी समुदाय सहित सभी अप्रवासी और गैर-श्वेत लोगों को बड़ी राहत देते हुए एक कट्टरपंथी न्यू-नाजी संगठन पर हमेशा के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। ऑस्ट्रेलिया के गृह मंत्री Tony Burke ने इस संगठन को देश विरोधी और नफरत फैलाने वाला घोषित करते हुए इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की घोषणा की।
सरकार के फैसले के बाद अब इस संगठन से जुड़ने, इसका प्रचार करने या फंडिंग देने वाले लोगों को 15 साल तक की जेल हो सकती है। बताया जा रहा है कि यह संगठन लंबे समय से भारतीयों, पंजाबियों और अन्य गैर-श्वेत समुदायों के खिलाफ नस्लीय नफरत फैलाने में सक्रिय था।
क्या है न्यू-नाजी संगठन?
यह संगठन वर्ष 2020 में अस्तित्व में आया था और जर्मन तानाशाह Adolf Hitler की नाजी विचारधारा से प्रेरित माना जाता है। संगठन का दावा था कि ऑस्ट्रेलिया केवल श्वेत लोगों के लिए है और अप्रवासियों या गैर-श्वेत समुदायों का वहां कोई अधिकार नहीं होना चाहिए।
संगठन सोशल मीडिया, सार्वजनिक रैलियों और प्रदर्शन के जरिए लोगों में नस्लीय नफरत फैलाने का काम करता था। भारतीयों और पंजाबियों को डराने-धमकाने के कई मामले सामने आने के बाद सरकार पर लगातार कार्रवाई का दबाव बढ़ रहा था।
पंजाबी समुदाय को कई बार बनाया निशाना
जानकारी के अनुसार मई 2023 में इस संगठन ने अप्रवासियों के खिलाफ एक बड़ी रैली निकाली थी, जिसमें पंजाबी और भारतीय समुदाय को खास तौर पर टारगेट किया गया। इस दौरान पुलिस के साथ झड़प भी हुई थी।
इसके बाद 2024 में ऑस्ट्रेलिया डे के मौके पर संगठन के सदस्यों ने नॉर्थ सिडनी रेलवे स्टेशन पर प्रदर्शन कर गैर-श्वेत लोगों को डराने और धमकाने की कोशिश की। इस दौरान पंजाबी समुदाय की पगड़ी को लेकर नस्लीय टिप्पणियां भी की गई थीं।
वहीं अगस्त 2025 में मेलबर्न के कैंप सॉवरेन्टी इलाके में अप्रवासियों के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन किया गया, जिसमें महिलाओं समेत कई लोगों पर डंडों और लाठियों से हमला किया गया था। इस घटना में चार लोग घायल हुए थे। हिंसा के बाद संगठन के नेता Thomas Sewell को गिरफ्तार किया गया था।
सरकार ने क्यों लगाया बैन?
लगातार बढ़ रही नस्लीय घटनाओं और कैंप सॉवरेन्टी हिंसा के बाद ऑस्ट्रेलिया सरकार ने देश में नफरत-विरोधी कानूनों को और सख्त किया। इन्हीं कानूनों के तहत गृह मंत्री टोनी बर्क ने इस संगठन को स्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया। सरकार का कहना है कि देश में हिंसा, डर और नस्लीय घृणा फैलाने वाले संगठनों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।








