पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि पर लगाम लगाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य के कोई भी निजी स्कूल अब एक शैक्षणिक वर्ष में 5 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेंगे।
सरकार के अनुसार, जिन स्कूलों ने पिछले तीन वर्षों के दौरान 15 प्रतिशत से अधिक फीस वृद्धि की है, उन्हें छात्रों और अभिभावकों से वसूली गई अतिरिक्त राशि वापस करनी पड़ सकती है। इसके लिए सरकार एक सख्त कानूनी व्यवस्था लागू करने जा रही है।
बताया जा रहा है कि प्रस्तावित कानून केवल ट्यूशन फीस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्कूलों द्वारा वसूले जाने वाले सभी प्रकार के शुल्कों पर लागू होगा। सरकार का दावा है कि यह निजी स्कूल फीस नियंत्रण से संबंधित देश का सबसे कड़ा कानून साबित हो सकता है।
यह नया कानून आगामी विधानसभा सत्र में पेश किए जाने की तैयारी है। इसके साथ ही पूर्व की कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार द्वारा बनाए गए कानून को भी रद्द करने की संभावना जताई जा रही है।
हाल ही में अमृतसर में फीस वृद्धि को लेकर सामने आए विवाद और अभिभावकों के विरोध के बाद सरकार ने यह कड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि शिक्षा के नाम पर अभिभावकों पर पड़ रहे आर्थिक बोझ को कम करना उसकी प्राथमिकता है।









