पंजाब के बठिंडा में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ टैटू वीडियो को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एक टैटू स्टूडियो द्वारा साझा किए गए वीडियो में महिलाओं के निजी अंगों पर टैटू बनाते हुए दृश्य दिखाई देने के बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया है। इन वीडियो पर निहंग नेता मनप्रीत सिंह खालसा ने कड़ी आपत्ति जताते हुए इन्हें सार्वजनिक मंचों पर साझा करने को सामाजिक मर्यादा के खिलाफ बताया है।
खालसा ने वीडियो संदेश जारी कर कहा कि इस तरह का कंटेंट सोशल मीडिया पर खुलेआम प्रसारित होने से समाज, विशेषकर बच्चों और युवाओं पर गलत प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने टैटू आर्टिस्ट से ऐसे वीडियो तुरंत हटाने और भविष्य में इस प्रकार की सामग्री पोस्ट न करने की अपील की है।
‘सार्वजनिक मंचों पर ऐसा कंटेंट उचित नहीं’
मनप्रीत सिंह खालसा ने कहा कि निजी अंगों पर टैटू बनवाना व्यक्ति का निजी निर्णय हो सकता है, लेकिन उससे जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करना उचित नहीं है। उनका कहना है कि ऐसी सामग्री सामाजिक मूल्यों और मर्यादाओं पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि टैटू बनवाना है तो शरीर के ऐसे हिस्सों पर बनवाया जाए, जिन्हें दिखाने के लिए कपड़े हटाने की आवश्यकता न पड़े। साथ ही उन्होंने निजी विचार रखते हुए कहा कि भविष्य में ऐसे टैटू वैवाहिक जीवन में विवाद का कारण भी बन सकते हैं।
SSP को दी शिकायत, विरोध की चेतावनी
निहंग नेता ने दावा किया कि उन्होंने पहले टैटू आर्टिस्ट से सीधे बात की, लेकिन जब कोई समाधान नहीं निकला तो बठिंडा के एसएसपी को लिखित शिकायत सौंप दी। उनके अनुसार शिकायत के बाद टैटू आर्टिस्ट के परिवार ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में इस तरह की सामग्री साझा नहीं की जाएगी और आर्टिस्ट ने भी माफी मांगी है।
हालांकि खालसा ने चेतावनी दी कि यदि विवादित वीडियो नहीं हटाए गए या भविष्य में इसी तरह का कंटेंट पोस्ट किया गया तो विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर बठिंडा के अलावा चंडीगढ़ और अन्य शहरों में भी ऐसे मामलों को उठाया जाएगा।
टैटू आर्टिस्ट ने रखा अपना पक्ष
दूसरी ओर टैटू आर्टिस्ट रनबीर सिंह ने अपने इंस्टाग्राम पेज ‘K4U Tattoos’ के माध्यम से अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वह पिछले छह वर्षों से वैध लाइसेंस के साथ पेशेवर रूप से काम कर रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि सभी टैटू ग्राहकों की इच्छा और सहमति से बनाए जाते हैं तथा वीडियो भी संबंधित ग्राहकों की अनुमति के बाद ही रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा किए जाते हैं। उनका कहना है कि इन वीडियो का उद्देश्य केवल अपने काम को लोगों तक पहुंचाना और स्टूडियो की सेवाओं की जानकारी देना है।
विवाद बना चर्चा का विषय
फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर बहस का विषय बना हुआ है। एक पक्ष इसे अभिव्यक्ति और पेशेवर प्रचार का हिस्सा मान रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सार्वजनिक मंचों पर इस तरह की सामग्री साझा किए जाने को सामाजिक मर्यादा के खिलाफ बता रहा है। मामले में प्रशासन की ओर से आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।












