पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र की भाजपा सरकार पर देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने भारत को “विश्वगुरु” बनाने का सपना दिखाया था, लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि ताइवान जैसा छोटा देश भी कई आर्थिक मानकों पर भारत से आगे निकल चुका है।
बुधवार को जारी बयान में हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि भाजपा के 12 वर्षों के शासन में देश आर्थिक मंदी, बढ़ते कर्ज, महंगाई, बेरोजगारी और निवेशकों के घटते भरोसे जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। उन्होंने दावा किया कि आम आदमी लगातार बढ़ती कीमतों के बोझ तले दबता जा रहा है, जबकि केंद्र सरकार आर्थिक हालात की सच्चाई छिपाने में लगी हुई है।
चीमा ने कहा कि भारत कभी दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था माना जाता था, लेकिन अब छठे स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने ताइवान का उदाहरण देते हुए कहा कि मात्र 2.5 करोड़ आबादी वाला देश मार्केट कैपिटलाइजेशन के मामले में भारत से आगे निकल गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर केंद्र सरकार देश की अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए क्या रणनीति अपना रही है।
वित्त मंत्री ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के रिस्क बफर को कम किए जाने के फैसले पर भी केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने बजट को संभालने के लिए आरबीआई की वित्तीय मजबूती से समझौता कर रही है। चीमा ने कहा कि आरबीआई द्वारा केंद्र को रिकॉर्ड डिविडेंड ट्रांसफर करने से पहले कंटिंजेंट रिस्क बफर को 7.5 प्रतिशत से घटाकर 6.5 प्रतिशत करना चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि सरकार सिर्फ अपने बजट को बैलेंस करने में लगी हुई है, चाहे इसके लिए तेल की कीमतें बढ़ानी पड़ें, महंगाई बढ़ानी पड़े या फिर आरबीआई की रिस्क मैनेजमेंट क्षमता को कमजोर करना पड़े। चीमा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार आर्थिक प्रबंधन में पूरी तरह विफल साबित हुई है और इसका खामियाजा देश की जनता भुगत रही है।
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि देश को पारदर्शी आर्थिक नीतियों, रोजगार सृजन, घरेलू मांग को मजबूत करने, महंगाई पर नियंत्रण और निवेशकों का भरोसा बहाल करने जैसी योजनाओं की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार को ध्यान भटकाने वाली राजनीति छोड़कर आर्थिक सुधारों पर फोकस करना चाहिए।








