देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और परीक्षा गड़बड़ी के मामलों को लेकर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि देश में ऐसी स्थिति बन गई है जहां सरकार एक परीक्षा तक ईमानदारी और व्यवस्थित तरीके से नहीं करा पा रही।
केजरीवाल ने कहा कि नीट, सीबीएसई 12वीं, एसएससी जीडी और अब बीटेक परीक्षाओं में भी गड़बड़ियों की खबरें सामने आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था पर “शिक्षा माफिया” का कब्जा हो चुका है और करोड़ों युवाओं के भविष्य का सौदा किया जा रहा है।
“हर परीक्षा में गड़बड़ी, आखिर जिम्मेदार कौन?”
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए केजरीवाल ने कहा कि एसएससी जीडी परीक्षा के दौरान कई जगह सर्वर फेल होने, परीक्षा केंद्रों पर क्षमता से अधिक छात्रों को बुलाने और अव्यवस्थाओं की शिकायतें मिली हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर देश में किस तरह की सरकार चल रही है जो एक पेपर भी सही ढंग से आयोजित नहीं कर पा रही।
उन्होंने आगे कहा कि शिक्षा माफिया को ऊपर बैठे प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण युवाओं के भविष्य के साथ लगातार खिलवाड़ हो रहा है। केजरीवाल ने युवाओं से अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए जागरूक होने की अपील भी की।
मनीष सिसोदिया ने भी केंद्र सरकार को घेरा
वहीं, दिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री और पंजाब में “आप” के प्रभारी Manish Sisodia ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछले 10 दिनों में ऐसा एक भी दिन नहीं गया जब किसी परीक्षा में पेपर लीक, धांधली या अव्यवस्था का मामला सामने न आया हो।
सिसोदिया ने कहा कि नीट पेपर लीक, सीबीएसई मूल्यांकन विवाद, यूपीएससी परीक्षा को लेकर विवाद और उत्तर प्रदेश बोर्ड परीक्षा में वीआईपी रोल नंबर जैसे मामलों ने शिक्षा व्यवस्था की साख को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।
उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री चुनावी राजनीति पर जितना ध्यान देते हैं, उसका एक छोटा हिस्सा भी परीक्षा प्रणाली सुधारने में लगाएं तो युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो सकता है।
“सिस्टम नहीं संभल रहा तो कुर्सी छोड़ दें”
मनीष सिसोदिया ने प्रधानमंत्री पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि न तो शिक्षा मंत्री से इस्तीफा लिया जा रहा है और न ही निष्पक्ष परीक्षाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि देश का युवा अब सवाल पूछ रहा है कि जब सरकार से सिस्टम नहीं संभल रहा, तो जिम्मेदारी क्यों नहीं ली जा रही।








