पंजाब के जालंधर में BSF हेडक्वार्टर के बाहर हुए IED ब्लास्ट मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। जालंधर पुलिस और खुफिया एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई में इस सनसनीखेज मामले को ट्रेस करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 28 वर्षीय मुनीर खान और अनिल शर्मा के रूप में हुई है।
सूत्रों के मुताबिक, दोनों आरोपियों को पुलिस विंग से मिली गुप्त सूचना के आधार पर गिरफ्तार किया गया। बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले में पाकिस्तान कनेक्शन भी सामने आया है और सुरक्षा एजेंसियां कई अहम बिंदुओं पर जांच कर रही हैं।
इंस्टाग्राम के जरिए पाकिस्तानी डॉन के संपर्क में आया मुनीर
जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी मुनीर खान इंस्टाग्राम के जरिए पाकिस्तानी डॉन शहजाद भट्टी के संपर्क में आया था। बताया जा रहा है कि मुनीर 10वीं कक्षा फेल है और सोशल मीडिया के जरिए ही उसे धमाके की साजिश में शामिल किया गया।
पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि ब्लास्ट को अंजाम देने के बदले आरोपी को करीब एक लाख रुपये दिए गए थे। वहीं, बम उपलब्ध कराने और पूरी साजिश रचने में भी पाकिस्तानी नेटवर्क की भूमिका सामने आ रही है।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस अब आरोपी को उस स्थान पर लेकर जाएगी जहां से विस्फोटक बरामद किया गया था।
धमाके का लाइव वीडियो बनाने वाला आरोपी भी गिरफ्तार
मामले में दूसरा आरोपी अनिल शर्मा भी पुलिस की गिरफ्त में आ चुका है। बताया जा रहा है कि अनिल उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर का रहने वाला है और वह एक एजेंसी के मुखबिर के रूप में काम करता था।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, अनिल भी पाकिस्तानी डॉन शहजाद भट्टी के संपर्क में था। उसे धमाके का लाइव वीडियो रिकॉर्ड करने के लिए 50 हजार रुपये दिए गए थे। आरोप है कि उसने धमाके का वीडियो बनाकर पाकिस्तान स्थित नेटवर्क तक पहुंचाया था।
हालांकि, इस पूरे मामले को लेकर अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
8 मिनट का टाइमर सेट कर रखा गया था बम
पूछताछ के दौरान आरोपी मुनीर खान ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उसने बताया कि इंस्टाग्राम के जरिए ही उसने बम का टाइमर सेट करना सीखा था।
आरोपी के अनुसार, घटना वाले दिन वह कार से PAP चौक तक पहुंचा और वहां से पैदल ब्लास्ट स्थल तक गया। उसने कांपते हाथों से 8 मिनट का टाइमर सेट किया था।
मुनीर ने पुलिस को बताया कि वह पहली बार इस तरह की घटना को अंजाम दे रहा था, जिसके कारण वह बेहद डरा हुआ था। उसे रास्ते भर इस बात का डर सता रहा था कि कहीं बम रास्ते में ही न फट जाए।
टाइमर सेट करने के बाद वह मौके से भागकर अपनी कार में बैठा और जीरकपुर की ओर निकल गया।
150 से ज्यादा CCTV कैमरे खंगालने के बाद मिला सुराग
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच के दौरान बस स्टैंड से लेकर PAP चौक तक करीब 150 से अधिक CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली गई। इसी दौरान एक संदिग्ध कार पुलिस के रडार पर आई।
वाहन की जांच करते-करते पुलिस की टीम जीरकपुर तक पहुंची, जहां संयुक्त छापेमारी के दौरान आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
सुरक्षा एजेंसियां अब इस मामले में पाकिस्तान समर्थित आतंकी नेटवर्क और सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को फंसाने वाले मॉड्यूल की गहराई से जांच कर रही हैं।








