सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने और यातायात नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से परिवहन विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। विभाग ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत आने वाले कई गंभीर ट्रैफिक उल्लंघनों को गैर-समझौता योग्य (Non-Compoundable) अपराध घोषित कर दिया है। अब ऐसे मामलों में मौके पर चालान भरकर राहत नहीं मिलेगी, बल्कि दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
परिवहन विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक मोटर वाहन अधिनियम की धारा 184 के अंतर्गत आने वाले खतरनाक ड्राइविंग से जुड़े अपराध अब नॉन-कम्पाउंडेबल होंगे। इनमें रेड लाइट जंप करना, स्टॉप साइन की अनदेखी करना, रॉन्ग साइड वाहन चलाना तथा लापरवाही और असावधानी से वाहन चलाना शामिल है, जिससे अन्य लोगों की जान और सुरक्षा को खतरा उत्पन्न होता है।
इसके अलावा धारा 185 के तहत शराब या किसी मादक पदार्थ के प्रभाव में वाहन चलाने तथा धारा 188 के अंतर्गत ऐसे अपराधों में सहयोग करने से जुड़े मामलों में भी अब किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकेगा। इन मामलों में दोषियों को विधिक प्रक्रिया का सामना करना होगा।
सरकार ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199A के तहत नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने के मामलों को भी गैर-समझौता योग्य अपराधों की सूची में शामिल कर दिया है। ऐसे मामलों में भी किसी प्रकार की कम्पाउंडिंग की अनुमति नहीं होगी।
परिवहन विभाग के सचिव वरुण रूजम, IAS द्वारा 17 जून को जारी अधिसूचना तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। विभाग का मानना है कि इन कड़े प्रावधानों से सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी और लोगों में ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूकता एवं जिम्मेदारी बढ़ेगी।
क्या बदला?
- रेड लाइट जंप करने पर अब मौके पर समझौता नहीं होगा।
- रॉन्ग साइड ड्राइविंग और खतरनाक ड्राइविंग पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।
- शराब या नशे में वाहन चलाने वालों को नहीं मिलेगी कम्पाउंडिंग की सुविधा।
- नाबालिग द्वारा वाहन चलाने के मामलों में भी सीधे कानूनी कार्रवाई होगी।










