दिल्ली के जंतर-मंतर से संसद भवन की ओर शांतिपूर्ण मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर शिवसेना पंजाब ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए केंद्र सरकार से प्रदर्शनकारियों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है।
शिवसेना पंजाब के सीनियर वाइस प्रधान इंद्रजीत करवल, राजेश पलटा, प्रदेश प्रवक्ता विपन शर्मा, शहरी प्रधान अंकुर बेदी, व्यापार विंग जिला प्रधान अशोक आहुजा और डॉ. रवि दत्त ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। ऐसे में प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग करना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।
‘बातचीत से निकले समाधान, बल प्रयोग से नहीं’
नेताओं ने कहा कि यदि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर संसद की ओर शांतिपूर्वक मार्च कर रहे थे, तो सरकार और प्रशासन का दायित्व था कि उनसे बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास करता। उन्होंने कहा कि लाठीचार्ज जैसी कार्रवाई से जनता के बीच गलत संदेश गया है।
लोकतंत्र में असहमति का सम्मान जरूरी
शिवसेना नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती असहमति के सम्मान में है, न कि उसे दबाने में। संविधान प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराने का अधिकार देता है। यदि सरकारें संवाद के बजाय बल प्रयोग का रास्ता अपनाएंगी तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होगी।
निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
संयुक्त बयान में मांग की गई कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में अनावश्यक बल प्रयोग की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। साथ ही सरकार प्रदर्शनकारियों से संवाद स्थापित कर उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करे।
नीट पेपर लीक मामले का भी किया जिक्र
शिवसेना नेताओं ने कहा कि नीट परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है। उनका आरोप है कि सरकार इस मांग को नजरअंदाज कर छात्रों के आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों की मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाना चाहिए।
सभी दलों और सामाजिक संगठनों से की अपील
इंद्रजीत करवल और राजेश पलटा ने कहा कि शिवसेना हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों, नागरिक अधिकारों और शांतिपूर्ण विरोध के पक्ष में खड़ी रही है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों से लोकतांत्रिक परंपराओं की रक्षा के लिए एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की।










