अभिनेता दिलजीत दोसांझ अभिनीत आगामी फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। शिवसेना के वरिष्ठ नेता इंद्रजीत करवल ने फिल्म पर पंजाब के इतिहास को कथित तौर पर एकपक्षीय ढंग से प्रस्तुत करने का आरोप लगाया है। उन्होंने केंद्र सरकार से फिल्म की फंडिंग की भी जांच कराने की मांग की है।
करवल ने जारी बयान में कहा कि किसी भी ऐतिहासिक घटना को अधूरे तथ्यों के आधार पर प्रस्तुत करना समाज और नई पीढ़ी के लिए नुकसानदायक हो सकता है। उनका आरोप है कि फिल्म में पंजाब के इतिहास के केवल एक पक्ष को प्रमुखता दी गई है, जबकि 1980 और 1990 के दशक में आतंकवाद के दौरान विभिन्न समुदायों के हजारों निर्दोष लोगों की पीड़ा और बलिदान को पर्याप्त स्थान नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि उस दौर में व्यापारी, कर्मचारी, जनप्रतिनिधि, पत्रकार और आम नागरिक आतंकवाद की चपेट में आए थे। उनका दावा है कि हिंदू समाज ने भी भय और असुरक्षा का लंबा दौर झेला, लेकिन फिल्म में इन पहलुओं को कथित तौर पर नजरअंदाज किया गया है।
‘इतिहास को संतुलित नजरिए से दिखाया जाए’
इंद्रजीत करवल ने कहा कि यदि किसी भी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय हुआ है तो उसे न्याय मिलना चाहिए, लेकिन इतिहास को संतुलित और तथ्यपरक तरीके से प्रस्तुत करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केवल एक वर्ग को पीड़ित और पंजाब पुलिस को पूरी तरह नकारात्मक रूप में दिखाना वास्तविक परिस्थितियों का संपूर्ण चित्र प्रस्तुत नहीं करता।
ऑपरेशन ब्लू स्टार और आतंकवाद का भी हो उल्लेख
शिवसेना नेता ने कहा कि ऑपरेशन ब्लू स्टार और उसके बाद आतंकवाद के खिलाफ चलाए गए अभियानों की पृष्ठभूमि को भी समझना जरूरी है। उनके अनुसार उस समय की परिस्थितियों और आतंकवाद की चुनौती को नजरअंदाज कर घटनाओं का मूल्यांकन करना उचित नहीं होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब में शांति बहाल करने में तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह, तत्कालीन पुलिस महानिदेशक के.पी.एस. गिल तथा सुरक्षा बलों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके अनुसार आतंकवाद के खिलाफ अभियान में शहीद हुए पुलिस अधिकारियों और जवानों के बलिदान को भी इतिहास का अभिन्न हिस्सा माना जाना चाहिए।
फंडिंग की जांच की मांग
करवल के साथ वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश पलटा, पंजाब प्रवक्ता विपन शर्मा, सिटी प्रधान अंकुर बेदी सहित अन्य नेताओं ने भी कहा कि ऐतिहासिक घटनाओं को राजनीतिक या वैचारिक दृष्टिकोण से नहीं बल्कि सभी तथ्यों और पक्षों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
शिवसेना नेताओं ने केंद्र सरकार से मांग की कि यह भी जांच कराई जाए कि इस कथित विवादित विषय पर बनी फिल्म की फंडिंग में किसी देशविरोधी तत्व की भूमिका तो नहीं है। हालांकि, इस संबंध में किसी सरकारी एजेंसी या फिल्म निर्माताओं की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।










