
आज फिर से 101 किसानों का जत्था अपनी मांगों को लेकर शंभू बॉर्डर से दिल्ली की और कूच करने जा रहा हैं। वहीं प्रशासन ने किसानों को रोकने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। शंभू बॉर्डर पर भारी संख्या में पुलिसबल को तैनात कर दिया गया है। साथ ही शंभू बॉर्डर पर कीलें लगाने और कंक्रीट की दीवारें बनाई गई है। जिससे किसानों का जत्था दिल्ली न पहुंच सके। इसके साथ ही शंभू बॉर्डर पर सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था को देखते हुए चार अलग-अलग सुरक्षा बलों के जवान तैनात किए गए हैं: IRB (Indo-Tibetan Border Police), RAF (Rapid Action Force), BSF (Border Security Force) और जिला पुलिस के जवान। वहीं आज जब किसान आगे बढ़ने के लिए बैरिकेंडिंग तोड़ने की कोशिश कर रहे थे तो हरियाणा पुलिसन ने किसानों को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने शुरु कर दिए। फिलहाल शंभू बॉर्डर पर तनाव का माहौल है। प्रशासन पूरी कोशिश कर रही है कि किसानों को आगे बढ़ने नहीं दिया जाए ।
#WATCH | Farmers’ ‘Dilli Chalo’ march | Visulas from the Shambhu border where Police use tear gas to disperse farmers
“We will first identify them (farmers) and then we can allow them to go ahead. We have a list of the names of 101 farmers, and they are not those people – they… pic.twitter.com/qpZM8LK1vw
— ANI (@ANI) December 8, 2024
हालांकि, हरियाणा पुलिस के अधिकारी ने अपने बयान मे बताया कि प्रशासन किसानों के जत्थे की पहचान की सख्त निगरानी कर रहा है और केवल उन किसानों को ही दिल्ली कूच की अनुमति देना चाहता है, जिनकी पहले से पहचान की गई है। उनके अनुसार, पुलिस के पास 101 किसानों की सूची है, जिन्हें दिल्ली जाने की अनुमति दी जाएगी। लेकिन किसानों का जत्था एक “भीड़” के रूप में आगे बढ़ रहा है, और पुलिस को यह समस्या आ रही है कि वे पूरी भीड़ की पहचान नहीं कर पा रहे हैं।
यह कड़ी सुरक्षा व्यवस्था इस बात का संकेत है कि प्रशासन किसानों के आंदोलन को लेकर गंभीर है और किसी भी प्रकार के अव्यवस्था या संघर्ष को रोकने के लिए पूरी ताकत लगा रहा है।सुरक्षा के चार लेयर का मतलब है कि हर स्तर पर अलग-अलग बलों के जवान तैनात हैं, ताकि स्थिति को पूरी तरह से नियंत्रित किया जा सके और आंदोलनकारियों को बॉर्डर से आगे न बढ़ने दिया जाए। वहीं किसान नेता सरवन सिंह पंढेर का बयान यह साफ़ करता है कि किसानों के मुद्दों का समाधान करने के लिए केंद्र सरकार ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है, जिसके कारण किसानों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। 8 दिसंबर को दिल्ली की ओर मार्च शुरू करने का निर्णय यह दर्शाता है कि किसान संगठन अपने मुद्दों के समाधान के लिए दबाव बढ़ा रहे हैं, और वे इस संघर्ष को जारी रखना चाहते हैं।
आपको बता दें कि इससे पहले भी 6 दिसंबर को पहले ही किसानों का जत्था दिल्ली की ओर बढ़ा था, लेकिन शंभू बॉर्डर पर हरियाणा पुलिस द्वारा उन्हें रोक दिया गया था। यह घटनाक्रम यह दर्शाता है कि प्रशासन किसानों के मार्च को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई कर रहा है, लेकिन किसान भी अपनी आवाज़ उठाने के लिए किसी भी दबाव से पीछे नहीं हटने का संकेत दे रहे हैं।
किसानों की मांगों में एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की कानूनी गारंटी, किसानों के खिलाफ विभिन्न केसों को वापस लेने और अन्य कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध शामिल हैं। अगर सरकार इन मांगों पर कार्रवाई नहीं करती, तो आंदोलन और बढ़ सकता है, जो देश में कृषि क्षेत्र की समस्याओं को और उजागर करेगा। यह स्थिति न केवल किसानों के लिए, बल्कि सरकार के लिए भी चुनौतीपूर्ण है। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसानों के मुद्दों को उचित तरीके से हल किया जाए, ताकि स्थिति और अधिक गंभीर न हो।









