
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मंत्रियों, विधायकों, चेयरमैनों और कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रताप सिंह बाजवा और प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग की टिप्पणियों के विरोध में चंडीगढ़ में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान ‘बैंड-बाजों’ के साथ बाजवा की रिहायश का घेराव किया गया। ‘आप’ नेताओं ने आरोप लगाया कि दलितों और मेहनतकश वर्ग का मजाक उड़ाने वाली भाषा कांग्रेस की सामंती सोच को उजागर करती है।
प्रदर्शन में कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ई.टी.ओ., उनकी पत्नी सुरिंदर कौर, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह सहित कई विधायक और सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे। इसी कड़ी में कादियां (गुरदासपुर) में भी ‘आप’ नेताओं ने बाजवा के घर के बाहर रोष प्रदर्शन किया।
“मेहनत की कमाई का मजाक शर्मनाक”
कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ई.टी.ओ. ने कहा कि किसी के पिता के ईमानदार पेशे पर तंज कसना केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे समुदाय का अपमान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके पिता ‘बैंड मास्टर’ थे और उसी मेहनत से परिवार चला। सरकारी स्कूल में पढ़ाई कर उन्होंने अपनी योग्यता से मुकाम हासिल किया। “हमने पसीने की कमाई की है, किसी तरह की तस्करी या गलत काम नहीं किए। यह अपमान हर उस परिवार का है जो मेहनत से बच्चों को पढ़ाता है,” उन्होंने कहा।
ई.टी.ओ. ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह दलित समाज को केवल वोट बैंक मानती है। “विधानसभा में ‘मटीरियल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल उसी सोच को दिखाता है जिसमें गरीब का बेटा आगे बढ़े, यह हजम नहीं होता,” उन्होंने कहा। उन्होंने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के समानता के सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा कि बराबरी के अधिकारों ने ही साधारण घरों के बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर दिया।
भड़काऊ बयान और कानून-व्यवस्था का सवाल
ई.टी.ओ. ने कहा कि एक ओर कांग्रेस कानून-व्यवस्था की बात करती है, दूसरी ओर रैलियों में खुलेआम हिंसक भाषा का प्रयोग किया जाता है। “किसी निर्वाचित प्रतिनिधि के खिलाफ ऐसे शब्द लोकतंत्र के खिलाफ हैं,” उन्होंने कहा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सार्वजनिक माफी नहीं आई तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी और जनता 2027 में जवाब देगी।
“कोई काम छोटा-बड़ा नहीं”
ई.टी.ओ. की पत्नी सुरिंदर कौर ने कहा कि ‘बाजा बजाने वाला’ कहकर पेशे को नीचा दिखाना गलत है। “कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता। एक ओर हिंसक बयान दिए जाते हैं, दूसरी ओर कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए जाते हैं—यह दोहरा रवैया है,” उन्होंने कहा।
“परिवारवाद खत्म कर आम घरों को पहचान”
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा ने वर्षों तक परिवारवाद को बढ़ावा दिया, जबकि ‘आप’ ने इसे तोड़कर आम घरों के पढ़े-लिखे युवाओं को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि दिल्ली के बाद पंजाब में भी राजनीति की दिशा बदली है। 2017 से आम पृष्ठभूमि के लोग विधानसभा पहुंचे और 2022 में जनता ने भारी समर्थन देकर साफ संदेश दिया कि वंशवाद स्वीकार नहीं।
चीमा ने कहा कि साधारण घरों के बच्चों की तरक्की से कुछ नेताओं को परेशानी है, इसलिए जातिगत टिप्पणियां की जाती हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब कैबिनेट में दलित वर्ग से बड़ी भागीदारी ऐतिहासिक है।
“दलित विरोधी सोच उजागर”
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि मेहनतकशों का मजाक उड़ाने वाली भाषा कांग्रेस की दलित विरोधी सोच को उजागर करती है। “ये बयान आम लोगों के प्रति नफरत दिखाते हैं,” उन्होंने कहा।
विधायिका इंदरजीत कौर ने कहा कि अपमानजनक शब्द केवल एक मंत्री नहीं, बल्कि पूरे दलित और मेहनतकश वर्ग के खिलाफ हैं। उन्होंने भड़काऊ बयानबाजी पर कानूनी कार्रवाई की मांग की और कहा कि ‘आप’ साधारण घरों की पार्टी है।
विधायक अमनशेर सिंह (शैरी कलसी) ने कहा कि पुराने राजनीतिक घराने आम घरों के बच्चों की राजनीति में एंट्री से घबराए हुए हैं। “2027 में जनता इस मानसिकता को करारा जवाब देगी,” उन्होंने कहा।
पुलिस से झड़प, वाटर कैनन का इस्तेमाल
प्रदर्शन के दौरान बाजवा के घर की ओर बढ़ रहे ‘आप’ नेताओं और पुलिस के बीच तीखी बहस हुई, जो बाद में झड़प में बदल गई। भीड़ को रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस दौरान कई कार्यकर्ता घायल हुए और कुछ नेताओं को हिरासत में लिया गया।
‘आप’ नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध दलितों और मेहनतकशों के सम्मान की रक्षा के लिए है। पार्टी ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा टूटने नहीं दी जाएगी और समानता के अधिकारों पर कोई समझौता नहीं











