पंजाब में होटल, ढाबा और रेस्टोरेंट जैसे हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी का खुलासा हुआ है। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि राज्य में करीब 200 करोड़ रुपये के टर्नओवर को छिपाने का मामला सामने आया है, जो जांच बढ़ने के साथ 500 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
वित्त मंत्री के अनुसार, राज्य स्तर पर चलाए गए डेटा-आधारित अभियान के तहत 882 संस्थानों को जांच के दायरे में लाया गया है। इनमें ढाबे, होटल, बेकरी, मिठाई की दुकानें, फास्ट-फूड आउटलेट और कैटरिंग सेवाएं शामिल हैं।
अब तक 239 मामलों की जांच पूरी की जा चुकी है, जिसमें करीब 50 करोड़ रुपये के टर्नओवर को छिपाने का पता चला है। इस पर 2.54 करोड़ रुपये का टैक्स बनता है, जिसमें से 2.02 करोड़ रुपये की वसूली सरकार कर चुकी है।
📊 500 करोड़ तक पहुंच सकता है घोटाला
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि यह जांच अभी शुरुआती चरण में है। जैसे-जैसे 2023-24 और 2024-25 के डेटा को शामिल किया जाएगा, टैक्स चोरी का कुल आंकड़ा 500 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
उन्होंने बताया कि कई व्यवसायी जानबूझकर कम आय दिखाकर टैक्स बचाने की कोशिश कर रहे थे, जिसे अब तकनीक के जरिए पकड़ा जा रहा है।
🏙️ बड़े शहर बने टैक्स चोरी के केंद्र
जांच में सामने आया कि मोहाली, जालंधर और लुधियाना जैसे बड़े शहर टैक्स चोरी के मुख्य केंद्र बनकर उभरे हैं।
- मोहाली: 8.16 करोड़ रुपये
- जालंधर: 6.72 करोड़ रुपये
- लुधियाना: 5.48 करोड़ रुपये
वहीं पटियाला (3.83 करोड़) और अमृतसर (0.99 करोड़) में अपेक्षाकृत कम अनियमितताएं पाई गईं।
🍽️ किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा गड़बड़ी
वित्त मंत्री ने बताया कि हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में अलग-अलग श्रेणियों में टैक्स चोरी का बड़ा नेटवर्क सामने आया है:
- ढाबों द्वारा: करीब 10 करोड़ रुपये
- छोटे खाने-पीने के स्थान (चाय-कॉफी बार): 8 करोड़ रुपये
- फास्ट-फूड चेन: 6 करोड़ रुपये से अधिक
इन सेक्टरों में नकद और डिजिटल (हाइब्रिड) भुगतान के जरिए आय छिपाने का पैटर्न पाया गया।
🧠 डेटा एनालिटिक्स से खुला बड़ा खेल
सरकार ने इस पूरे मामले का खुलासा एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स, टैक्स इंटेलिजेंस यूनिट और स्टेट इन्वेस्टिगेशन एंड प्रिवेंटिव यूनिट (SIPU) की मदद से किया है।
इसके अलावा ‘बिल लाओ, इनाम पाओ’ योजना ने भी टैक्स चोरी पकड़ने में अहम भूमिका निभाई।
अधिकारियों ने ऑनलाइन बिलिंग ऐप्स, जीएसटी रिटर्न और डिजिटल पेमेंट डेटा का मिलान कर उन संस्थानों की पहचान की, जहां वास्तविक आय और घोषित आय में बड़ा अंतर था।
⚖️ सख्त चेतावनी, लेकिन ईमानदारों को राहत
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने साफ कहा कि जो भी कर चोरी में शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 52 संस्थानों में कोई गड़बड़ी नहीं मिली, जो यह दर्शाता है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और डेटा-आधारित है।
उन्होंने कहा कि ईमानदारी से टैक्स देने वाले व्यापारियों को सरकार हर संभव सुविधा देती रहेगी।
🔍 आगे क्या होगा?
सरकार अब यूपीआई और अन्य डिजिटल भुगतान के डेटा को भी जांच में शामिल करने जा रही है, जिससे टैक्स चोरी पकड़ने की प्रक्रिया और सटीक होगी।
वित्त मंत्री ने उम्मीद जताई कि अगले एक महीने के भीतर जांच और वसूली की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
🗣️ मंत्री का बयान
हरपाल सिंह चीमा ने कहा,
“भगवंत मान सरकार तकनीक और डेटा के जरिए राजस्व की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। कर चोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जबकि नियमों का पालन करने वालों को पूरा सहयोग दिया जाएगा।”









