शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के शहीदी दिवस पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने खटकड़ कलां और हुसैनीवाला में श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद बंगा में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश के राजनीतिक नेताओं ने अपने नाम पर भव्य स्मारक और स्टेडियम तो बना लिए, लेकिन शहीद-ए-आज़म भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जैसे महान क्रांतिकारियों को उचित सम्मान नहीं दिया गया।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर शहीदों के सपनों का “रंगला पंजाब” बनाने की अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई और लोगों से उनके विचारों को अपनाने का आह्वान किया।
🇮🇳 “अगर भगत सिंह पहले प्रधानमंत्री होते, तो देश अलग होता”
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने संबोधन में कहा कि अगर शहीद-ए-आज़म भगत सिंह भारत के पहले प्रधानमंत्री बने होते, तो आज देश की दिशा और स्थिति बिल्कुल अलग होती। उन्होंने कहा कि भगत सिंह केवल एक क्रांतिकारी ही नहीं, बल्कि दूरदर्शी विचारक भी थे, जिनकी सोच आज भी प्रासंगिक है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि आज़ादी के बाद देश की कमान युवाओं को सौंप दी जाती, तो भारत आज वैश्विक स्तर पर अग्रणी राष्ट्र बन चुका होता।
⚡ “2014 में आज़ादी का दावा करना शहीदों का अपमान”
मुख्यमंत्री ने बिना नाम लिए कुछ राजनीतिक दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग आज दावा करते हैं कि भारत को वास्तविक आज़ादी 2014 में मिली, वे शहीदों के बलिदान का अपमान कर रहे हैं।
उन्होंने कहा,
“जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में कुछ नहीं खोया, वही आज इतिहास को अपने हिसाब से पेश कर रहे हैं।”
🏛️ “नेताओं ने अपने नाम पर स्मारक बनाए, शहीदों को भुलाया”
भगवंत मान ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश में नेताओं ने अपने नाम पर स्मारक बनवाने में रुचि दिखाई, लेकिन भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जैसे महान शहीदों के सम्मान के लिए ठोस प्रयास नहीं किए गए।
उन्होंने दोहराया कि इन शहीदों को अब तक ‘भारत रत्न’ न दिया जाना देश के लिए शर्म की बात है।
✈️ एयरपोर्ट नामकरण पर केंद्र से टकराव
मुख्यमंत्री ने बताया कि मोहाली हवाई अड्डे का नाम शहीद भगत सिंह के नाम पर रखने के लिए पंजाब सरकार को केंद्र से लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी। उन्होंने कहा कि कई बार मांग को नजरअंदाज किया गया, लेकिन लगातार प्रयासों के बाद यह संभव हो पाया।
इसके साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि हलवारा हवाई अड्डे का नाम शहीद करतार सिंह सराभा के नाम पर रखने के लिए केंद्र से बातचीत जारी है।
🏥 स्वास्थ्य और रोजगार पर सरकार का फोकस
अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की उपलब्धियों को भी गिनाया। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने लोगों के लिए 10 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कार्ड सुनिश्चित किया है, जिससे अब किसी भी नागरिक को इलाज के लिए पैसों की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।
इसके अलावा उन्होंने बताया कि अब तक 65,000 से अधिक सरकारी नौकरियां युवाओं को दी जा चुकी हैं और शिक्षा क्षेत्र में बड़े सुधार किए जा रहे हैं।
📚 “शिक्षा ही गरीबी खत्म करने का सबसे बड़ा हथियार”
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि गरीबी और सामाजिक बुराइयों को खत्म करने का एकमात्र स्थायी समाधान शिक्षा है। उन्होंने कहा कि मुफ्त योजनाएं अस्थायी राहत देती हैं, लेकिन शिक्षा लोगों को सशक्त बनाकर स्थायी बदलाव लाती है।
उन्होंने कहा,
“अगर हमें समाज में वास्तविक परिवर्तन लाना है, तो हमें अपने बच्चों को शिक्षित करना होगा और उन्हें सक्षम बनाना होगा।”
🗳️ “वोट की ताकत समझें, इसे कभी न बेचें”
मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र की ताकत पर जोर देते हुए कहा कि आज के समय में वोट ही सबसे बड़ा हथियार है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने वोट का इस्तेमाल सोच-समझकर करें और कभी भी लालच में आकर इसे न बेचें।
उन्होंने कहा कि यह अधिकार शहीदों की कुर्बानी से मिला है, इसलिए इसका सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है।
🏗️ हुसैनीवाला विरासत प्रोजेक्ट का शिलान्यास
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने 24.99 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले ‘हुसैनीवाला विरासत’ प्रोजेक्ट का शिलान्यास भी किया। यह परियोजना शहीदों की याद को संजोने और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है।
इसमें आधुनिक सुविधाओं से लैस गैलरी, 3D शो, म्यूजिकल फाउंटेन, पार्क और अन्य आकर्षण शामिल होंगे, जो आने वाली पीढ़ियों को इतिहास से जोड़ेंगे।
🕊️ “शहीदों को सिर्फ तारीखों तक सीमित न रखें”
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगत सिंह जैसे महान नायकों को केवल उनके जन्मदिन या शहीदी दिवस पर याद करना पर्याप्त नहीं है। उनके विचारों को जीवन में उतारना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे शहीदों के आदर्शों पर चलकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाएं।
🔥 पंजाब का ऐतिहासिक योगदान
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की आबादी में केवल 2% हिस्सा होने के बावजूद, आजादी के आंदोलन में पंजाब का योगदान सबसे अधिक रहा है। उन्होंने बताया कि फांसी या निर्वासन झेलने वाले 80% स्वतंत्रता सेनानी पंजाब से थे।
उन्होंने विभाजन के दर्द को याद करते हुए कहा कि जब देश आजादी का जश्न मना रहा था, तब पंजाब ने सबसे ज्यादा पीड़ा झेली।








