
आम आदमी पार्टी पंजाब ने तथाकथित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने इस समझौते को किसान-विरोधी और देश के हितों के खिलाफ बताते हुए कहा है कि इससे भारतीय कृषि को भारी नुकसान होगा। आम आदमी पार्टी का आरोप है कि यह समझौता अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोलने की साजिश है, जिसका सीधा खामियाजा देश के करोड़ों किसानों को भुगतना पड़ेगा।
आम आदमी पार्टी पंजाब के मुख्य प्रवक्ता और विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि भाजपा नेता सुनील जाखड़ इस समझौते को उपलब्धि बताकर पंजाब और देश के किसानों को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जाखड़ या तो इस समझौते के परिणामों को समझ नहीं रहे या फिर जानबूझकर सच्चाई छुपा रहे हैं।
धालीवाल ने कहा कि सुनील जाखड़ यह कह रहे हैं कि आम आदमी पार्टी चुप है, जबकि हकीकत यह है कि समझौते की घोषणा के दिन से ही पार्टी लगातार सवाल उठा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने देश को अंधेरे में रखा। प्रधानमंत्री ने संसद में इस समझौते पर कोई साफ जवाब नहीं दिया और देश को इसकी जानकारी अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों से मिली।
धालीवाल ने कहा कि ट्रंप ने अपने बयानों में बार-बार कृषि क्षेत्र का जिक्र किया, जो हर भारतीय किसान के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से भारतीय बाजार अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए खोल दिए गए हैं, जिन पर वहां भारी सब्सिडी दी जाती है। इसके मुकाबले भारतीय किसानों को बहुत सीमित सरकारी सहायता मिलती है, जिससे प्रतिस्पर्धा असंभव हो जाएगी।
उन्होंने लाल ज्वार का उदाहरण देते हुए बताया कि इसका बड़ा उत्पादन अमेरिका में होता है, जबकि भारत में इसे सूखे और कठिन हालात में गरीब किसान उगाते हैं। भारत में इस फसल पर न्यूनतम समर्थन मूल्य का भी मजबूत आधार नहीं है। ऐसे में यदि अमेरिकी लाल ज्वार भारतीय बाजार में आया तो देशी किसानों की फसल बिकना मुश्किल हो जाएगा।
धालीवाल ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिकी मक्का, बाजरा, कपास, सेब, बादाम और डेयरी उत्पाद भारत में खुले तौर पर बिकने लगे तो पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के किसान बुरी तरह प्रभावित होंगे। सेब उत्पादक राज्यों के बागवान सस्ते अमेरिकी सेबों से मुकाबला नहीं कर पाएंगे और कपास किसानों की हालत और खराब हो जाएगी।
उन्होंने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह कोई बराबरी का व्यापार समझौता नहीं है। पहले भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में कम टैरिफ लगता था, लेकिन बाद में इसमें भारी बढ़ोतरी की गई। दूसरी ओर, भारत ने अमेरिकी उत्पादों पर लगने वाले शुल्क लगभग खत्म कर दिए। धालीवाल ने कहा कि यह समझौता नहीं, बल्कि भारत के आर्थिक हितों का समर्पण है।
सुनील जाखड़ पर निशाना साधते हुए धालीवाल ने कहा कि वे हमेशा सत्ता में बैठे लोगों की तारीफ करते हैं। जब कांग्रेस की सरकार थी, तब वे उसकी प्रशंसा करते थे और अब भाजपा सरकार की। लेकिन उन्होंने कभी किसानों और पंजाब के हितों की बात मजबूती से नहीं रखी। उन्होंने कहा कि नेताओं को अपने राजनीतिक आकाओं के बजाय किसानों के लिए बोलना चाहिए।
धालीवाल ने दोहराया कि यह समझौता भारतीय किसानों के खिलाफ है और इससे खेती घाटे का सौदा बन जाएगी। उन्होंने कहा कि पहले से ही कर्ज में डूबे किसान और अधिक दबाव में आ जाएंगे, जिससे हालात और बिगड़ सकते हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि अमेरिका को तो अपने कृषि उत्पादों के लिए बड़ा बाजार मिल गया, लेकिन भारतीय किसानों के लिए क्या बचा? इसका जवाब भाजपा और उसके नेता दें। धालीवाल ने सुनील जाखड़ को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि वे सार्वजनिक रूप से बताएं कि अमेरिकी कृषि उत्पाद आने के बाद भारतीय किसानों को क्या लाभ होगा।
आम आदमी पार्टी ने स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे को हर मंच पर उठाएगी और किसानों के हितों से समझौता नहीं होने देगी। पार्टी ने भाजपा नेताओं को चेतावनी दी कि देश को गुमराह करना बंद करें, वरना जनता समय आने पर जवाब देगी।









