
पंजाब सरकार ने ड्राइविंग लाइसैंस बनवाने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और एजैंट-रहित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। ट्रांसपोर्ट विभाग के एन.आई.सी. पोर्टल में एक नई अपडेशन लागू की गई है, जिसके तहत अब कोई भी वाहन चाहे वह दोपहिया हो या चारपहिया, एक ही दिन में केवल एक बार ड्राइविंग टैस्ट के लिए उपयोग में लाया जा सकेगा।
यह महत्वपूर्ण बदलाव राज्यभर के ऑटोमेटेड ड्राइविंग टैस्ट सैंटरों में लागू किया गया है। इस नियम के लागू होते ही अब यह संभव नहीं होगा कि एक ही वाहन का कई बार इस्तेमाल करके अलग-अलग आवेदकों को टैस्ट दिलवाया जाए। इस नए नियम के तहत यदि कोई आवेदक अपने ड्राइविंग टैस्ट के लिए किसी विशेष वाहन का उपयोग करता है तो वही वाहन उस दिन किसी अन्य आवेदक के ड्राइविंग टैस्ट के लिए प्रयोग नहीं किया जा सकेगा। सिस्टम उस दूसरे ट्रैक टैस्ट को ऑटोमेटिक रिजैक्ट कर देगा।
यह व्यवस्था दोपहिया और चार-पहिया दोनों श्रेणियों के वाहनों पर समान रूप से लागू होगी। इसका उद्देश्य लाइसैंस प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना, फर्जीवाड़ा रोकना और असली आवेदकों को प्राथमिकता देना है।
आखिर ट्रांसपोर्ट विभाग ने क्यों उठाया यह कदम?
इस बदलाव की प्रमुख वजह फर्जीवाड़े की बढ़ती शिकायतें रही हैं। ऑटोमेटिड ड्राइविंग टैस्ट सैंटरों के बाहर एजैंटों की सक्रियता लगातार प्रशासन के लिए चिंता का विषय बनी हुई थी। इन एजैंटों के पास खुद के वाहन होते थे, जिन्हें वे पैसे लेकर उन आवेदकों को उपलब्ध कराते थे, जिनके पास खुद का वाहन नहीं था। ऐसे में एक ही वाहन का दिन में कई बार अलग-अलग लोगों द्वारा इस्तेमाल होता था, जिससे न केवल सिस्टम की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगता था बल्कि आवेदकों से भी मोटी रकम ऐंठी जाती रही है। इस नई प्रणाली के तहत अब प्रत्येक वाहन का एक यूनिक उपयोग रिकॉर्ड होगा और एक बार ट्रैक पर उपयोग हो जाने के बाद उसी दिन उसका दोबारा प्रयोग नहीं हो सकेगा।








