
चंडीगढ़, 2 मार्च। पंजाब में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान ने एक वर्ष सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस मौके पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने राज्यवासियों को बधाई देते हुए कहा कि यह अभियान पंजाब को नशा मुक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों के दौरान ड्रग व्यापार को संरक्षण मिला, जिससे कई पीढ़ियां प्रभावित हुईं। लेकिन वर्तमान सरकार ने नशे की सप्लाई लाइन तोड़ने और बड़े तस्करों को जेल भेजने के लिए निर्णायक कार्रवाई की है।
36,178 एफआईआर, 51,648 गिरफ्तारियां
मुख्यमंत्री के अनुसार, मार्च 2025 से फरवरी 2026 तक जीरो-टॉलरेंस नीति के तहत 36,178 एफआईआर दर्ज की गईं और 51,648 तस्करों को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान 2,277 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई, जबकि 49 लाख से अधिक नशीली गोलियां और कैप्सूल बरामद किए गए।
उन्होंने बताया कि 16.70 करोड़ रुपये की ड्रग मनी भी बरामद की गई है। इसके अलावा तस्करों की करोड़ों रुपये की संपत्तियां जब्त या ध्वस्त की गई हैं, जिससे अवैध नेटवर्क की कमर टूटी है।
सजा दर 88 प्रतिशत तक पहुंची
मुख्यमंत्री ने कहा कि एनडीपीएस एक्ट के तहत मामलों की सुनवाई में उल्लेखनीय तेजी आई है। सजा दर 2025 में बढ़कर करीब 88 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो मजबूत केस तैयारी और फॉरेंसिक सहयोग का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि यह केवल पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि जनता के सहयोग से चला जन आंदोलन है। गांव-गांव और शहर-शहर लोगों ने नशे के खिलाफ आवाज उठाई, जिससे यह मुहिम व्यापक रूप ले सकी।
युवाओं को बचाने की लड़ाई जारी
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सरकार नशा तस्करों को किसी भी कीमत पर बख्शेगी नहीं। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई पंजाब की युवा पीढ़ी को बचाने के लिए है और इसे लगातार आगे बढ़ाया जाएगा।
सरकार का दावा है कि आने वाले समय में रोकथाम, पुनर्वास और जनजागरूकता कार्यक्रमों को और मजबूत किया जाएगा, ताकि नशे की समस्या जड़ से खत्म की जा सके।








