शहीद मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘सतलज’ को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने को लेकर पंजाब की राजनीति लगातार गरमा रही है। आम आदमी पार्टी (AAP) पंजाब ने सोमवार को इस फैसले का विरोध करते हुए केंद्र सरकार पर पंजाब के इतिहास को दबाने का आरोप लगाया और फिल्म को तत्काल दोबारा ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की मांग की।
पार्टी के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह केवल एक फिल्म का मामला नहीं, बल्कि पंजाब के इतिहास और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा विषय है।
‘नई पीढ़ी को इतिहास से दूर रखने की कोशिश’
बलतेज पन्नू ने कहा कि आज के डिजिटल दौर में फिल्में इतिहास को समझने का प्रभावी माध्यम बन चुकी हैं। उनका कहना था कि यदि ऐतिहासिक विषयों पर बनी फिल्मों को लोगों तक पहुंचने से रोका जाएगा तो नई पीढ़ी पंजाब के अतीत की महत्वपूर्ण घटनाओं से अनजान रह जाएगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि ‘सतलज’ जैसी फिल्मों को हटाकर इतिहास के संवेदनशील अध्यायों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
फिल्म के नाम बदलने का भी किया जिक्र
पन्नू ने बताया कि इस फिल्म को रिलीज़ होने से पहले कई चरणों से गुजरना पड़ा। उनके अनुसार पहले इसका नाम ‘घल्लूघारा’ रखा गया, बाद में इसे ‘पंजाब 95’ किया गया और अंततः ‘सतलज’ नाम से रिलीज़ किया गया। उन्होंने कहा कि ओटीटी पर आने के कुछ ही समय बाद फिल्म हटाए जाने से कई सवाल खड़े होते हैं।
भाजपा, कांग्रेस और अकाली दल पर लगाए आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बलतेज पन्नू ने भाजपा और कांग्रेस पर पंजाब के इतिहास को दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि फिल्म में दर्शाए गए विषय कुछ राजनीतिक दलों के लिए असहज हो सकते हैं।
साथ ही उन्होंने शिरोमणि अकाली दल पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि जसवंत सिंह खालड़ा के परिवार को उस समय अपेक्षित सहयोग नहीं मिला, जबकि आज इस मुद्दे पर राजनीतिक बयान दिए जा रहे हैं।
बीबी परमजीत कौर खालड़ा के बयान का किया उल्लेख
पन्नू ने जसवंत सिंह खालड़ा की पत्नी बीबी परमजीत कौर खालड़ा के एक वायरल इंटरव्यू का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें परिवार के संघर्ष और उस दौर के अनुभव सामने आए हैं। उन्होंने दावा किया कि उस समय परिवार को पर्याप्त सहयोग नहीं मिला।
‘सेंसरशिप से इतिहास नहीं मिटेगा’
AAP नेता ने कहा कि किसी फिल्म को हटाने से ऐतिहासिक तथ्य नहीं बदलते और न ही मानवाधिकारों के लिए संघर्ष करने वालों के योगदान को भुलाया जा सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से फिल्म ‘सतलज’ को जल्द से जल्द ओटीटी प्लेटफॉर्म पर बहाल करने की मांग की।










