शहीद मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘सतलज’ को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने को लेकर पंजाब की राजनीति गरमा गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) पंजाब ने इस फैसले का विरोध करते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया है।
पार्टी के मुख्य प्रवक्ता कुलदीप सिंह धालीवाल ने सोमवार को चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए फिल्म से प्रतिबंध हटाने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि यह फिल्म पंजाब के कठिन दौर और उस समय हुई घटनाओं को सामने लाती है, जिन्हें दबाने की कोशिश की जा रही है।
‘इतिहास को छिपाया नहीं जा सकता’
धालीवाल ने कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा ने मानवाधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करते हुए कथित फर्जी पुलिस मुठभेड़ों और लावारिस शवों के मामलों को उजागर किया था। उनके अनुसार, ऐसे ऐतिहासिक विषय पर बनी फिल्म को डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाना लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ है।
उन्होंने केंद्र सरकार से फिल्म को दोबारा उपलब्ध कराने की मांग की।
भाजपा, कांग्रेस और अकाली दल पर साधा निशाना
प्रेस वार्ता के दौरान कुलदीप सिंह धालीवाल ने भाजपा, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल पर भी राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब के इतिहास से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को नई पीढ़ी से दूर रखने की कोशिश की जा रही है।
धालीवाल ने दावा किया कि फिल्म उस दौर की घटनाओं को सामने लाती है, इसलिए उसे हटाया गया है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित दलों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
बीबी परमजीत कौर खालड़ा के इंटरव्यू का किया जिक्र
धालीवाल ने जसवंत सिंह खालड़ा की पत्नी बीबी परमजीत कौर खालड़ा के एक हालिया इंटरव्यू का उल्लेख करते हुए कहा कि उसमें बताए गए अनुभव बेहद भावुक करने वाले हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय परिवार को पर्याप्त राजनीतिक समर्थन नहीं मिला।
उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के नेतृत्व पर भी सवाल उठाए और कहा कि मानवाधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले परिवार को अपेक्षित सहयोग नहीं दिया गया।
फिल्म से प्रतिबंध हटाने की मांग
आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार से फिल्म ‘सतलज’ पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग करते हुए कहा कि इतिहास और मानवाधिकारों से जुड़े विषयों पर बनी फिल्मों को जनता तक पहुंचने दिया जाना चाहिए।










