गुरदासपुर: हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही भारी बारिश तथा बादल फटने की घटनाओं ने पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों की चिंता बढ़ा दी है। इन परिस्थितियों में रावी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है और कई बार रातों-रात बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं। सबसे अधिक असर गुरदासपुर और पठानकोट जिले के रावी किनारे बसे गांवों पर पड़ता है, जहां लोग हर मानसून में भय के साये में जीवन बिताने को मजबूर हैं।
बाढ़ से पहले तैयारी नहीं, ग्रामीणों में नाराजगी
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ड्रेनेज विभाग की ओर से बाढ़ से निपटने के लिए पर्याप्त और समय रहते इंतजाम नहीं किए जाते। नतीजतन हर वर्ष मानसून के दौरान ग्रामीणों को जान-माल के नुकसान का डर सताता रहता है।
हिमाचल से पंजाब तक बढ़ जाता है पानी का दबाव
रावी नदी हिमाचल प्रदेश से रंजीत सागर डैम और शाहपुर कंडी डैम होते हुए माधोपुर हेडवर्क्स के रास्ते पठानकोट और फिर गुरदासपुर जिले में प्रवेश करती है। जैनीपुर के पास जम्मू-कश्मीर से आने वाली उज्ज नदी और शिंगरावां का पानी भी रावी में मिल जाता है, जिससे नदी का बहाव बेहद तेज और खतरनाक हो जाता है।
मकोड़ा पत्तन जैसे इलाकों में हालात इतने गंभीर हो जाते हैं कि बाढ़ के दौरान नदी में नाव तक नहीं उतारी जाती।
400 करोड़ की परियोजना अब भी अधर में
रावी नदी के अतिरिक्त पानी और स्थानीय नालों के बहाव को नियंत्रित करने के लिए जैनीपुर के पास लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत से एक डैम बनाने की योजना तैयार की गई थी। इस परियोजना का उद्देश्य बाढ़ नियंत्रण के साथ-साथ नदी पार बसे गांवों को सड़क संपर्क उपलब्ध कराना भी है।
बताया जाता है कि आवश्यक मंजूरियां मिलने के बावजूद कई वर्षों से इस परियोजना पर काम शुरू नहीं हो सका है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
धुस्सी बांध भी नहीं रोक पा रहा बाढ़ का पानी
रावी नदी के भारतीय किनारे पर बना धुस्सी बांध बाढ़ से सुरक्षा के लिए तैयार किया गया था, लेकिन ग्रामीणों द्वारा खेतों तक पहुंचने के लिए बनाए गए रास्तों से इसकी मजबूती प्रभावित होती है। बाढ़ के समय कई स्थानों पर बांध क्षतिग्रस्त हो जाता है, जिससे पानी आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश कर जाता है।
पाकिस्तान की ओर से भी बढ़ती है चुनौती
स्थानीय जानकारों के अनुसार, पाकिस्तान की ओर बने तटबंध और पुराने समय में खोदे गए नाले के कारण भी रावी का बहाव भारतीय क्षेत्र की ओर अधिक रहता है। भू-आकृतिक ढलान के कारण पानी का दबाव भी भारतीय सीमा की तरफ ज्यादा पड़ता है, जिससे पंजाब के सीमावर्ती गांवों को हर साल नुकसान उठाना पड़ता है।
स्थायी समाधान की मांग
सीमावर्ती गांवों के लोगों का कहना है कि हर मानसून में उन्हें बाढ़ का डर सताता है। उनका मांग है कि रावी नदी के किनारे मजबूत बाढ़ सुरक्षा व्यवस्था, तटबंधों की समय पर मरम्मत और लंबित परियोजनाओं को जल्द पूरा किया जाए, ताकि हर वर्ष होने वाले नुकसान से राहत मिल सके।










