मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब मंत्रिमंडल ने राज्य के समग्र विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए स्वास्थ्य, उच्च शिक्षा, शहरी विकास और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई ऐतिहासिक और जनहितैषी फैसलों को मंजूरी दे दी है। मंत्रिमंडल की इस अहम बैठक में लहरागागा में मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की स्थापना, देश की पहली व्यापक प्राइवेट डिजिटल ओपन यूनिवर्सिटी नीति-2026, प्लॉट अलॉटियों के लिए एमनेस्टी नीति में विस्तार, गमाडा संपत्तियों की कीमतों का तर्कसंगतीकरण, राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के लिए रेत निकासी तथा कर्मचारियों के हितों की रक्षा से जुड़े निर्णय लिए गए।
सरकार का कहना है कि ये फैसले न केवल आम नागरिकों को सीधी राहत देंगे, बल्कि पंजाब को स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनाने में भी सहायक सिद्ध होंगे।
लहरागागा में बनेगा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, 220 बेड व 50 MBBS सीटों के साथ होगी शुरुआत
पंजाब में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा फैसला लेते हुए मंत्रिमंडल ने संगरूर जिले के लहरागागा में मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल स्थापित करने के लिए 19 एकड़ से अधिक भूमि आवंटित करने को मंजूरी दे दी है। यह मेडिकल कॉलेज जैन समुदाय द्वारा स्थापित किया जाएगा और इसे अल्पसंख्यक मेडिकल कॉलेज का दर्जा प्राप्त होगा।
सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, मेडिकल कॉलेज की शुरुआत 220 बिस्तरों वाले अस्पताल और 50 एमबीबीएस सीटों के साथ की जाएगी। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि आठ वर्षों के भीतर इस संस्थान का विस्तार कर 400 बिस्तर और 100 एमबीबीएस सीटें की जाएंगी।
मंत्रिमंडल ने स्पष्ट किया है कि:
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कॉलेज की फीस संरचना पूरी तरह राज्य सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप होगी
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दाखिला प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी
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एमओयू लागू होने के पांच वर्षों के भीतर अस्पताल संचालन अनिवार्य होगा
इस परियोजना से न केवल मालवा क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब की स्थिति भी और मजबूत होगी।
डिजिटल शिक्षा में क्रांति: पंजाब प्राइवेट डिजिटल ओपन यूनिवर्सिटी नीति-2026 को मंजूरी
कैबिनेट बैठक का सबसे ऐतिहासिक निर्णय पंजाब प्राइवेट डिजिटल ओपन यूनिवर्सिटी नीति-2026 को मंजूरी देना रहा। इसके साथ ही पंजाब देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने निजी डिजिटल ओपन यूनिवर्सिटियों के लिए एक व्यापक और स्पष्ट नीति तैयार की है।
इस नीति का उद्देश्य:
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ऑनलाइन और ओपन डिस्टेंस लर्निंग (ODL) को कानूनी व संस्थागत ढांचा देना
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युवाओं को किफायती, आधुनिक और रोजगार-उन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराना
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डिजिटल माध्यम से उच्च शिक्षा को घर-घर तक पहुंचाना
सरकार का मानना है कि आज के दौर में शिक्षा को केवल पारंपरिक कक्षाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता। लाखों छात्र पहले से ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, एआई टूल्स और डिजिटल कोर्सेज के माध्यम से शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
अब घर बैठे पूरी डिग्री करना होगा संभव
नई नीति के लागू होने के बाद छात्र:
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मोबाइल या लैपटॉप के माध्यम से पूरी डिग्री कर सकेंगे
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नौकरी या पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ पढ़ाई जारी रख सकेंगे
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यूजीसी और एआईसीटीई मान्यता प्राप्त डिग्रियां हासिल कर सकेंगे
इससे पहले देश में केवल फिजिकल कैंपस आधारित यूनिवर्सिटियों की अनुमति थी, जिसके चलते छात्रों को कौशल और डिग्री के बीच अंतर का सामना करना पड़ता था। नई नीति इस अंतर को समाप्त करेगी।
डिजिटल यूनिवर्सिटी के लिए सख्त मानक तय
सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल गंभीर और सक्षम संस्थाओं को ही डिजिटल यूनिवर्सिटी खोलने की अनुमति दी जाएगी। इसके लिए:
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न्यूनतम 2.5 एकड़ भूमि
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डिजिटल कंटेंट स्टूडियो
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सर्वर व कंट्रोल रूम
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24×7 स्टूडेंट सपोर्ट सिस्टम
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कम से कम 20 करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड
अनिवार्य किया गया है। प्रत्येक प्रस्तावित डिजिटल यूनिवर्सिटी के लिए पंजाब विधानसभा में अलग विधेयक भी लाया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।
एमनेस्टी नीति-2025 में विस्तार, प्लॉट अलॉटियों को बड़ी राहत
कैबिनेट ने शहरी विकास के तहत एमनेस्टी नीति-2025 में विस्तार को भी मंजूरी दी है। इसके तहत:
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डिफॉल्ट अलॉटियों को 31 मार्च 2026 तक आवेदन का अवसर
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तीन महीनों में बकाया राशि जमा करने की सुविधा
इस फैसले से हजारों अलॉटियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो विभिन्न कारणों से भुगतान में चूक कर चुके थे।
गमाडा संपत्तियों की कीमतों में कटौती, रियल एस्टेट को मिलेगा बढ़ावा
जनहित को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल ने गमाडा की संपत्तियों की रिजर्व कीमतों को तर्कसंगत बनाने का फैसला लिया है। अब:
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स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ताओं की रिपोर्ट के आधार पर दरें तय होंगी
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बार-बार न बिकने वाली संपत्तियों की कीमत घटाई जाएगी
इससे रियल एस्टेट क्षेत्र में नई गति आने और निवेश बढ़ने की संभावना है।
लुधियाना-रोपड़ सड़क परियोजना के लिए एनएचएआई को रेत निकासी की मंजूरी
बुनियादी ढांचे को गति देने के लिए मंत्रिमंडल ने एनएचएआई को सतलुज नदी से रेत निकालने की अनुमति दी है। यह अनुमति:
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3 रुपये प्रति घन फुट की दर पर
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30 जून 2026 तक
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विशेष परियोजनाओं के लिए सीमित
होगी। इससे लुधियाना-रोपड़ राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना समय पर पूरी करने में मदद मिलेगी।
बाबा हीरा सिंह भट्ठल इंस्टीट्यूट के कर्मचारियों को सरकारी विभागों में समायोजन
कर्मचारियों के हितों की रक्षा के उद्देश्य से कैबिनेट ने बाबा हीरा सिंह भट्ठल इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट के स्टाफ को सरकारी विभागों और स्वायत्त संस्थानों में डेपुटेशन पर समायोजित करने की मंजूरी दी है।









