
चंडीगढ़: शहर के प्रमुख सरकारी अस्पतालों की तर्ज पर अब पीजीआई ने भी अपने स्टाफ की हाजिरी बायोमेट्रिक सिस्टम से लगाने का फैसला किया है। यह व्यवस्था सोमवार, 2 मार्च से लागू होगी। शुरुआत एडवांस्ड पीडियाट्रिक सेंटर (APC) से की जा रही है।
पीजीआई प्रशासन के अनुसार यह कदम मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उठाया गया है। एपीसी स्टाफ की ओर से इस संबंध में प्रशासन को प्रस्ताव दिया गया था, जिस पर विचार के बाद आदेश जारी किए गए। संस्थान के डायरेक्टर प्रो. विवेक लाल के निर्देशानुसार सभी प्रशासनिक और तकनीकी कर्मचारियों को नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।
मरीजों की परेशानी बनी वजह
अधिकारियों का कहना है कि ओपीडी और वार्ड में कई बार जरूरी टेस्ट और अन्य प्रक्रियाओं में देरी की शिकायतें मिल रही थीं। दोपहर बाद संबंधित स्टाफ उपलब्ध न होने से बच्चों को अगले दिन फिर बुलाना पड़ता था, जिससे ओपीडी पर दबाव बढ़ता था। नई व्यवस्था से स्टाफ की उपस्थिति सुनिश्चित होगी और इलाज की प्रक्रिया तेज होगी।
10 मिनट की देरी पर आधी छुट्टी कटेगी
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सुबह 9:30 बजे तक बायोमेट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य।
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अधिकतम 10 मिनट की छूट, वह भी विशेष परिस्थिति में।
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10 मिनट से ज्यादा देरी पर कैजुअल लीव से आधे दिन की कटौती।
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महीने में दो बार एक घंटे की देरी को अतिरिक्त मेडिकल सुपरिटेंडेंट उचित कारण पर माफ कर सकते हैं।
यदि किसी को आपात कारण से अवकाश चाहिए तो उसी दिन कंट्रोलिंग ऑफिसर और प्रशासनिक ईमेल पर सूचना देना जरूरी होगा। हर महीने की समीक्षा के बाद आदतन देरी करने वालों की सूची एस्टैब्लिशमेंट ब्रांच को सौंपी जाएगी।
तकनीकी दिक्कत की स्थिति में रजिस्टर में हाजिरी दर्ज की जाएगी।
क्या बदलेगा इस फैसले से?
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मरीजों को समय पर टेस्ट और इलाज
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ओपीडी में भीड़ का दबाव कम
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प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी
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ड्यूटी घंटों का सख्ती से पालन








