
पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के पूर्व चेयरमैन विजय सांपला के आवास पर आज डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाई गई। इस दौरान विजय सांपला के अलावा उपस्थित हुए भाजपा नेताओं बलभद्र सेन दुग्गल पूर्व नगर कौंसिल प्रधान, तेजस्वी भारद्वाज पूर्व चेयरमैन नगर सुधार ट्रस्ट फगवाड़ा, महिन्द्र थापर और आशु सांपला के अलावा अन्य गणमान्यों ने स्व. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की तस्वीर पर माल्यार्पण करते हुए उन्हें नमन किया। श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन परिचय देते हुए पूर्व मंत्री विजय सांपला ने बताया कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 06 जुलाई 1901 को बंगाल के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ। उनके पिता एक शिक्षाविद् और बुद्धिजीवी के रूप में प्रसिद्ध थे। श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने तत्कालीन कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि हासिल की और वे 1923 में सीनेट के सदस्य बने। उन्होंने बताया कि देश आजाद होने के बाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की गलत नीति के चलते पहले तो कश्मीर के आधे भाग पर पाकिस्तान ने कब्जा कर लिया। बाकी आधे को नेहरू ने अपने मित्र शेख अब्दुल्ला को खुश करने के लिये धारा 370 के अन्तर्गत विशेष दर्जा दे दिया था। जिसके फलस्वरूप शेष भारत के लोगों को जम्मू-कश्मीर में दाखिल होने के लिये परमिट की आवश्यकता होती थी। इतना ही नहीं जम्मू कश्मीर का अलग ध्वज और अलग संविधान भी था। जिसका श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कड़ा विरोध किया।
वे जम्मू-कश्मीर को भारत का पूर्ण और अभिन्न अंग बनाना चाहते थे। संसद में अपने भाषण में उन्होंनें धारा-370 को समाप्त करने की भी जोरदार वकालत की। अगस्त 1952 में जम्मू कश्मीर की विशाल रैली में उन्होंने अपना संकल्प व्यक्त किया था कि या तो मैं आपको भारतीय संविधान प्राप्त कराऊंगा या फिर इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये अपना जीवन बलिदान कर दूंगा। डा. मुखर्जी अपने संकल्प को पूरा करने के लिये 1953 में बिना परमिट लिये जम्मू-कश्मीर की यात्रा पर निकल पड़े। वहां पहुंचते ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 23 जून 1953 को जेल में रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गयी। जेल में उनकी मृत्यु ने देश को हिलाकर रख दिया और परमिट सिस्टम समाप्त हो गया। उन्होंने कश्मीर को लेकर एक नारा दिया था कि, एक देश में नहीं चलेगा दो विधान, दो प्रधान और दो निशान।
पूर्व नगर कौंसिल प्रधान बलभद्र सेन दुग्गल, नगर सुधार ट्रस्ट फगवाड़ा के पूर्व चेयरमैन तेजस्वी भारद्वाज और महिन्द्र थापर ने कहा कि बेशक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान से परमिट सिस्टम खत्म हो गया लेकिन कश्मीर का विशेष दर्जा तब भी लागू रहा। जिसे वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 5 अगस्त 2019 को खत्म करके श्यामा प्रसाद मुखर्जी के संकल्प को पूरा किया और कश्मीर का भारत में पूर्ण विलय हो गया। सांपला सहित समूह भाजपा नेताओं ने विश्वास जताया कि पाक अधिकृत कश्मीर को भी वापिस लेने का काम प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार ही करेगी। वक्ताओं ने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान प्रत्येक भारत वासी के लिये प्रेरणा है। हमें शपथ लेनी चाहिये कि हमारा जीवन देश को समर्पित है। देश की एकता और अखंडता के लिये हमें मर मिटने के लिये सदैव तैयार रहना चाहिये।
इस अवसर पर मेघराज बंगा, किशन बजाज, सुरिंदर शिंदा, इंद्रजीत सोनकर, दशरथ डुमेली, बलविंदर ठाकुर, प्रमोद मिश्रा, आशु पुरी, राजिंदर सोंधी, सुरिंदर जॉर्डन, पवन कौल, राजकुमार राणा, शिवरंजन दुग्गल, जतिन वोहरा, नैंसी सांपला, भारती शर्मा, रजनी बाला, चंदा मिश्रा, अंजलि पांडे, राधिका सरीन, कविता, नीलम, दीपक मल्होत्रा, महेश बंगा, लोकेश बाली, बॉबी, केशव, विनायक, अशोक दुग्गल, सिद्धार्थ, संदीप शर्मा, गगन खतरोल, दीनबंधु, बेवन शर्मा, शुभम ठाकुर, भजन भगतपुरा, विशाल वालिया आदि मौजूद थे।







