ई-20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) की एक रिपोर्ट में ई-20 ईंधन में अधिक क्लोराइड और नमी (Moisture) के कारण वाहनों को नुकसान पहुंचने की बात कही गई थी, लेकिन सरकार के दबाव में इस रिपोर्ट को वापस करा दिया गया।
केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि यदि वैज्ञानिक और ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग से जुड़ी रिपोर्टें ई-20 पर सवाल उठा रही हैं, तो केंद्र सरकार इसे पूरे देश में लागू करने पर इतनी जोर क्यों दे रही है।
’28 जुलाई को रिपोर्ट सौंपी, 4 अगस्त को वापस कराई गई’
केजरीवाल का दावा है कि SIAM ने विभिन्न ऑटोमोबाइल कंपनियों के अध्ययन के आधार पर 28 जुलाई को केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में कथित तौर पर यह उल्लेख किया गया था कि ई-20 ईंधन में अधिक क्लोराइड और नमी के कारण वाहनों के विभिन्न पार्ट्स प्रभावित हो सकते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद 4 अगस्त तक सरकार ने SIAM पर दबाव बनाकर रिपोर्ट वापस करवा दी। बाद में SIAM की ओर से यह कहा गया कि रिपोर्ट के कुछ तथ्यों का पुनः परीक्षण किया जाएगा।
केंद्र सरकार से पूछे सवाल
केजरीवाल ने कहा कि यदि रिपोर्ट में कोई तकनीकी खामी थी तो उसे सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी रिपोर्ट वापस लेने की आवश्यकता क्यों पड़ी और सरकार इस पूरे मामले पर पारदर्शिता क्यों नहीं दिखा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि जब विशेषज्ञ और ऑटोमोबाइल उद्योग के तकनीकी अध्ययन ई-20 पर चिंताएं जता रहे हैं, तब सरकार को सभी तथ्यों को सार्वजनिक कर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।












