
पंजाबी सिनेमा एक बार फिर विवादों की चपेट में आ गया है। दिलजीत दोसांझ की ‘सरदार जी 3’ के बाद अब गायक व अभिनेता अमरिंदर गिल की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘चल मेरा पुत्त 4’ को भारत में रिलीज की मंजूरी नहीं मिली है। फिल्म में पाकिस्तानी कलाकारों की मौजूदगी के चलते यह मामला सेंसर बोर्ड में अटक गया है।
🎞️ 1 अगस्त को होनी थी रिलीज, लेकिन भारत में अधर में लटकी रिलीज
निर्माताओं ने फिल्म की रिलीज डेट 1 अगस्त 2025 घोषित की है, लेकिन सेंसर बोर्ड ने अब तक इसे प्रमाणपत्र जारी नहीं किया है।
अगर जल्द मंजूरी नहीं मिलती, तो फिल्म को विदेशों में तो रिलीज किया जाएगा, लेकिन भारतीय दर्शकों को सिनेमा हॉल में यह फिल्म देखने का मौका नहीं मिल पाएगा।
🎭 विवाद की जड़: पाकिस्तानी हास्य कलाकारों की भागीदारी
‘चल मेरा पुत्त’ फ्रेंचाइज़ी की सबसे बड़ी खासियत इसका भारत-पाक साझा कलाकार सहयोग रहा है। लेकिन इस बार यही कारण बन गया है अड़चन:
-
इफ्तिखार ठाकुर
-
अकरम उद्दास
-
नासिर चिन्योती
इन तीनों पाकिस्तानी हास्य कलाकारों की फिल्म में मौजूदगी को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर विरोध जताया जा रहा है।
🧨 इफ्तिखार ठाकुर के विवादित बयान ने भड़काया मुद्दा
पाकिस्तानी कलाकार इफ्तिखार ठाकुर के पुराने बयान ने स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। उन्होंने एक बयान में कहा था:
“अगर तुम हवा से आओगे तो बम गिरेंगे, समंदर से आओगे तो डुबो दिए जाओगे, और जमीन से आओगे तो दफन कर दिए जाओगे।”
इसके अलावा उन्होंने यह भी दावा किया था कि भारतीय पंजाबी फिल्में पाकिस्तानी कलाकारों के बिना सफल नहीं हो सकतीं।
💥 बिन्नू ढिल्लों और सीएम मान ने दिया तीखा जवाब
पंजाबी अभिनेता बिन्नू ढिल्लों ने इस पर मुंहतोड़ प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
“हम पाकिस्तानी कलाकारों के साथ काम नहीं करेंगे। देशविरोधियों को भारत में कलाकारी दिखाने का मौका नहीं मिलेगा।”
वहीं, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी तल्ख टिप्पणी की:
“पाकिस्तान में भुखमरी है। ये सभी पहले मेरे साथ ‘लाफ्टर चैलेंज’ में रोटियां खाते थे। अब खुद कहते हैं – लाहौर और कराची भी भारत को दे दो, ताकि पेट भर सके।“
🎥 पहले भी फंसी थी दिलजीत की फिल्म
गौरतलब है कि इससे पहले दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सरदार जी 3’ को भी पाकिस्तानी अभिनेत्री हानिया आमिर की उपस्थिति के चलते भारत में रिलीज़ की अनुमति नहीं मिली थी।
📌 निष्कर्ष: क्या कला को सीमाओं से ऊपर माना जाए या नहीं?
‘चल मेरा पुत्त’ और ‘सरदार जी’ जैसी फिल्में हास्य और सांस्कृतिक मेलजोल का प्रतीक रही हैं। लेकिन बदलते राजनीतिक और सामाजिक माहौल में अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या कला को भी देशभक्ति के तराजू पर तोलना चाहिए?
या फिर राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए सांस्कृतिक संबंधों पर विराम लगाना ज़रूरी हो गया है?









