
शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की कानूनी परेशानियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। अब उनके खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला सरकारी कार्य में बाधा डालने और विजिलेंस टीम के साथ बहसबाजी करने को लेकर दर्ज हुआ है।
📝 क्या है मामला?
जानकारी के अनुसार, जब हाल ही में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो की टीम बिक्रम मजीठिया के अमृतसर स्थित आवास पर गिरफ्तारी के लिए पहुंची, तो उस दौरान मजीठिया और उनके कुछ समर्थकों ने कथित तौर पर सरकारी कार्य में बाधा डाली। पुलिस का कहना है कि टीम के साथ बहसबाजी की गई, और उन्हें अपने कर्तव्यों को निभाने से रोका गया।
इसी आरोप के तहत अमृतसर पुलिस ने बिक्रम मजीठिया और उनके साथियों के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज की है।
⚖️ कानूनी धाराएं
पुलिस ने यह एफआईआर आईपीसी की धारा 186 (सरकारी कर्मचारी के कार्य में बाधा), 353 (सरकारी कर्मचारी पर हमला/आपत्ति) सहित अन्य धाराओं के तहत दर्ज की है।
🗣️ राजनीतिक प्रतिक्रिया
अकाली दल ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार देते हुए कहा है कि सरकार जानबूझकर मजीठिया को निशाना बना रही है। पार्टी का दावा है कि मजीठिया ने छापेमारी में कोई रुकावट नहीं डाली, और यह सब AAP सरकार की रणनीति का हिस्सा है।
🔎 पृष्ठभूमि:
इससे पहले मजीठिया के खिलाफ विजिलेंस द्वारा ₹540 करोड़ की अवैध संपत्ति के मामले में भी एक बड़ी FIR दर्ज की गई थी, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया। अब इस नई FIR से उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।









