अमृतसर में मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत संचालित एक बस पर हुए हमले को लेकर पंजाब की राजनीति गरमा गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस घटना के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया कि सरकार की जनकल्याणकारी योजना को मिल रहे व्यापक समर्थन से विपक्ष बौखला गया है।
चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस वार्ता में AAP पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू और पार्टी नेता शमिंदर सिंह खिंडा ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार की मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना राज्य की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं में शामिल हो चुकी है और इसकी बढ़ती लोकप्रियता कुछ राजनीतिक दलों को रास नहीं आ रही।
AAP का आरोप- गिरफ्तार आरोपियों के कांग्रेस से हैं संबंध
बलतेज पन्नू ने दावा किया कि अमृतसर ग्रामीण पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों के कांग्रेस से संबंध हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बस पर बिना किसी उकसावे के हमला किया गया और इसका उद्देश्य सरकार की लोकप्रिय योजना को बदनाम करना था।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद कुछ कांग्रेस नेताओं ने आरोपियों के पक्ष में पुलिस पर दबाव बनाने का प्रयास किया। हालांकि इन आरोपों पर कांग्रेस की ओर से इस समाचार के प्रकाशित होने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
‘सरकार योजना जारी रखेगी’
AAP नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना को किसी भी कीमत पर बाधित नहीं होने दिया जाएगा। उनके अनुसार सरकार धार्मिक यात्राओं के माध्यम से आम लोगों, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को निःशुल्क तीर्थ दर्शन का अवसर उपलब्ध करा रही है।
3.5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने उठाया लाभ: AAP
पार्टी नेता शमिंदर सिंह खिंडा ने दावा किया कि अब तक 3.5 लाख से अधिक श्रद्धालु इस योजना का लाभ उठा चुके हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में श्रद्धालुओं को श्री आनंदपुर साहिब, माता नैना देवी और श्री दरबार साहिब जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा कराई जा रही है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में हरिद्वार, ऋषिकेश, मथुरा, वृंदावन, खाटू श्याम और सालासर धाम के लिए भी यात्रा सेवाएं शुरू करने की योजना है।
यात्रा का पूरा खर्च सरकार उठाती है
AAP नेताओं के अनुसार मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत यात्रियों के परिवहन, भोजन, ठहरने और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का पूरा खर्च पंजाब सरकार वहन करती है। उनका कहना है कि यह योजना विशेष रूप से उन लोगों के लिए शुरू की गई है जो आर्थिक कारणों से धार्मिक स्थलों की यात्रा नहीं कर पाते थे।










