जसवंत सिंह खालड़ा हत्याकांड के दोषियों की कथित समय से पहले रिहाई को लेकर पंजाब की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) पंजाब के स्टेट मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने दोषियों की समय से पहले रिहाई से जुड़ी किसी भी फाइल पर न तो हस्ताक्षर किए हैं और न ही पंजाब सरकार स्तर पर ऐसी किसी प्रक्रिया को मंजूरी दी गई है।
पन्नू ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया और कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म पर पंजाब सरकार को बदनाम करने के उद्देश्य से भ्रामक और तथ्यहीन खबरें प्रसारित की जा रही हैं।
‘पूरा मामला केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में’
बलतेज पन्नू ने कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा हत्याकांड की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने की थी। ऐसे मामलों में दोषियों की समय से पहले रिहाई का फैसला नए कानूनी प्रावधानों के तहत केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के अधिकार क्षेत्र में आता है, न कि पंजाब सरकार के।
उन्होंने दावा किया कि पूर्व डीएसपी जसपाल सिंह ने वर्ष 2017 में समय से पहले रिहाई के लिए आवेदन किया था, जिसे उस समय केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्यपाल स्तर पर खारिज कर दिया गया था। इसके बाद भी पूरा मामला केंद्र सरकार के स्तर पर ही विचाराधीन रहा।
‘मान सरकार के पास कोई फाइल नहीं आई’
AAP नेता ने कहा कि पंजाब सरकार के पास इस संबंध में कोई फाइल विचार के लिए नहीं आई। ऐसे में मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा किसी फाइल पर हस्ताक्षर करने या मामला राज्यपाल के पास लंबित होने के दावे पूरी तरह निराधार हैं।
उन्होंने विपक्षी दलों पर राजनीतिक लाभ के लिए झूठा प्रचार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता को किसी भी खबर पर विश्वास करने से पहले तथ्यों की जांच करनी चाहिए।
अकाली दल पर भी बोला हमला
प्रेस वार्ता के दौरान बलतेज पन्नू ने शिरोमणि अकाली दल पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने बीबी परमजीत कौर खालड़ा के हालिया बयान का हवाला देते हुए दावा किया कि अकाली दल ने सत्ता में आने से पहले जसवंत सिंह खालड़ा मामले में न्याय दिलाने का वादा किया था, लेकिन सरकार बनने के बाद उस वादे को पूरा नहीं किया।
पन्नू ने आरोप लगाया कि उस समय दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के बजाय संबंधित अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं।
फेक न्यूज पर कार्रवाई की मांग
AAP नेता ने बिना तथ्यों की पुष्टि किए खबरें प्रकाशित करने वाले कुछ मीडिया संस्थानों की भी आलोचना की। उन्होंने पंजाब सरकार से अपील की कि अफवाहें फैलाने और भ्रामक समाचार प्रकाशित करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि समाज में भ्रम की स्थिति पैदा न हो।










