कनाडा में पंजाबी मूल की एक महिला जेल गार्ड को कैदी की मदद करने और अपने पद का दुरुपयोग करने के मामले में अदालत ने दो वर्ष की कंडीशनल (सशर्त) सजा सुनाई है। अदालत के आदेश के अनुसार महिला को निर्धारित अवधि तक हाउस अरेस्ट (घर में नजरबंद) रहना होगा और सामुदायिक सेवा (कम्युनिटी सर्विस) भी करनी होगी।
मामले के अनुसार 31 वर्षीय रमनदीप ने वर्ष 2021 में नॉर्थ फ्रेजर प्री-ट्रायल सेंटर में करेक्शनल ऑफिसर (जेल गार्ड) के रूप में नौकरी शुरू की थी। इसी दौरान उसकी एक कैदी से नजदीकियां बढ़ गईं। जांच में सामने आया कि दोनों कई महीनों तक जेल के आधिकारिक फोन सिस्टम और कैदी के पास मौजूद एक अवैध मोबाइल फोन के जरिए संपर्क में थे।
जांच से पहले कैदी को देती थी सूचना
जांच एजेंसियों के मुताबिक रमनदीप को इस बात की जानकारी थी कि संबंधित कैदी के पास अवैध मोबाइल फोन है, लेकिन उसने इसकी सूचना अधिकारियों को नहीं दी। आरोप है कि वह जेल में होने वाली तलाशी या जांच से पहले कैदी को सतर्क कर देती थी, ताकि वह मोबाइल फोन छिपा सके।
अदालत में स्वीकार किया आरोप
जांच के बाद पुलिस ने रमनदीप के खिलाफ सार्वजनिक अधिकारी द्वारा विश्वासघात (Breach of Trust) का मामला दर्ज किया। अदालत की सुनवाई के दौरान उसने कैदी के अवैध मोबाइल को छिपाने में मदद करने का आरोप स्वीकार कर लिया। हालांकि कैदी के साथ अनुचित संबंध रखने से जुड़ा आरोप बाद में हटा दिया गया।
जेल नहीं भेजा गया, लेकिन आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज
24 जून 2026 को अदालत ने रमनदीप को दो साल की कंडीशनल सजा सुनाई। इस दौरान उसे हाउस अरेस्ट के नियमों का पालन करना होगा और सामुदायिक सेवा भी करनी होगी। हालांकि उसे जेल नहीं भेजा गया, लेकिन उसके खिलाफ आपराधिक रिकॉर्ड (Criminal Record) दर्ज हो गया है।
अदालत की सख्त टिप्पणी
सजा सुनाते हुए अदालत ने कहा कि किसी जेल अधिकारी द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करना सार्वजनिक विश्वास को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। ऐसे मामलों से न केवल न्याय व्यवस्था की साख पर असर पड़ता है, बल्कि जेल में कार्यरत अन्य कर्मचारियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।










