चंडीगढ़। पंजाब में दलित राजनीति को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी (आप) ने भाजपा के हालिया संगठनात्मक कार्यक्रम को मुद्दा बनाते हुए विपक्षी दल पर सामाजिक भेदभाव के आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि कार्यक्रम के दौरान अनुसूचित जाति समुदाय से जुड़े वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा की गई, जिससे भाजपा की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
पंजाब के वित्त मंत्री और वरिष्ठ ‘आप’ नेता हरपाल सिंह चीमा ने मंगलवार को आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि भाजपा लगातार सामाजिक न्याय और समानता की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर कुछ और दिखाई देती है। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय सांपला और सोम प्रकाश जैसे अनुभवी नेताओं को वह सम्मान नहीं दिया गया, जिसके वे हकदार थे।
चीमा ने कहा कि पंजाब जैसे राज्य में, जहां अनुसूचित जाति समुदाय की आबादी बड़ी संख्या में है, ऐसे घटनाक्रम राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के भीतर निर्णय लेने और नेतृत्व की भूमिका में सामाजिक संतुलन दिखाई नहीं देता।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ‘आप’ नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों और दलित समुदाय से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि देशभर में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के खिलाफ अपराधों के आंकड़े चिंताजनक हैं और इस दिशा में ठोस प्रयासों की जरूरत है।
हरपाल चीमा ने कहा कि पंजाब में सामाजिक सौहार्द और भाईचारे की परंपरा रही है। ऐसे में किसी भी वर्ग या समुदाय से जुड़े नेताओं की कथित अनदेखी लोगों के बीच गलत संदेश भेज सकती है। उन्होंने भाजपा नेतृत्व से इस मामले पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा चुनावों के बाद पंजाब में दलित वोट बैंक को लेकर राजनीतिक दलों के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है। ऐसे में इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति को और गर्मा सकते हैं।
हालांकि, भाजपा की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पार्टी का पक्ष सामने आने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।









