पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने के मामलों पर सख्ती दिखाते हुए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा निजी स्कूलों की फीस वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए व्यापक सुधारों की घोषणा के 24 घंटे के भीतर ही स्कूल शिक्षा विभाग ने नए कानून का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
स्कूल शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने विभाग के सचिव को पत्र जारी कर फीस ढांचे में सुधार के लिए आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक कदम तत्काल उठाने के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि इस फैसले से राज्य के करीब 32 लाख विद्यार्थियों और उनके परिवारों को राहत मिलेगी।
सालाना 5% से अधिक फीस बढ़ाने पर लगेगी रोक
प्रस्तावित कानून के तहत निजी स्कूलों को एक वर्ष में 5 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाने की अनुमति नहीं होगी। सरकार का उद्देश्य शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है ताकि अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।
हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि पंजाब में लगभग 7,800 निजी स्कूलों में 32 लाख से अधिक विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं और इन विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिकता है।
अतिरिक्त वसूली गई फीस लौटानी होगी
सरकार के प्रस्तावित नियमों के अनुसार जिन निजी स्कूलों ने पिछले तीन वर्षों के दौरान निर्धारित 15 प्रतिशत सीमा से अधिक फीस बढ़ाई है, उन्हें अभिभावकों से वसूली गई अतिरिक्त राशि वापस करनी होगी।
शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि शिक्षा सेवा का माध्यम है, न कि मुनाफाखोरी का कारोबार। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा के व्यावसायीकरण को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है।
सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांतों के अनुरूप होगा कानून
हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि भारत का सर्वोच्च न्यायालय भी कई बार स्पष्ट कर चुका है कि निजी संस्थान उचित फीस ले सकते हैं, लेकिन शिक्षा क्षेत्र में अत्यधिक मुनाफाखोरी स्वीकार्य नहीं है। इसी सिद्धांत के आधार पर पंजाब सरकार नया कानून तैयार कर रही है।
उन्होंने बताया कि विभाग को जल्द से जल्द विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
कांग्रेस सरकार की नीति पर भी उठाए सवाल
पंजाब सरकार ने आरोप लगाया कि वर्ष 2019 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने ऐसे प्रावधान लागू किए थे, जिनसे निजी स्कूलों को फीस बढ़ाने की खुली छूट मिल गई थी। स्कूलों को केवल नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर संशोधित फीस प्रदर्शित करने के बाद फीस बढ़ाने की अनुमति मिल जाती थी, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ा।
सरकार का दावा है कि नया कानून इस व्यवस्था को समाप्त कर निजी स्कूलों के लिए एक पारदर्शी और जवाबदेह नियामक ढांचा स्थापित करेगा।
अभिभावकों को मिलेगी बड़ी राहत
पंजाब सरकार का मानना है कि हर बच्चे को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए। प्रस्तावित कानून के लागू होने के बाद फीस वृद्धि पर नियंत्रण के साथ-साथ अभिभावकों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।









