पंजाब के लुधियाना में सामने आए करोड़ों रुपए के इंटरनेशनल साइबर फ्रॉड मामले ने पूरे शहर को हैरान कर दिया है। जिस युवक को लोग रोजाना सब्जी मंडी और दुकान पर मेहनत करते देखते थे, वही विदेशी नागरिकों को ऑनलाइन ठगी का शिकार बनाने वाले बड़े साइबर नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड निकला।
लुधियाना पुलिस ने आरोपी की पहचान मुनीश के रूप में की है। बाहर से साधारण जिंदगी जीने वाला यह युवक बेहद शातिर तरीके से अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह चला रहा था। पुलिस की बड़ी कार्रवाई में अब तक 140 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि कई अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।
गुप्त सूचना के बाद पुलिस ने मारे छापे
पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा के अनुसार पुलिस को सूचना मिली थी कि शहर में कुछ फर्जी कॉल सेंटर संचालित किए जा रहे हैं, जहां से विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर ऑनलाइन ठगी की जा रही है। इसके बाद पुलिस ने गुप्त जांच शुरू की और शहर के कई कमर्शियल परिसरों में एक साथ रेड की।
छापेमारी के दौरान दर्जनों युवक-युवतियां कंप्यूटर सिस्टम पर काम करते मिले। मौके से भारी मात्रा में लैपटॉप, मोबाइल फोन, बैंक रिकॉर्ड और विदेशी नागरिकों का डेटा बरामद किया गया।
फर्जी वायरस अलर्ट भेजकर करते थे ठगी
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी विदेशी नागरिकों के कंप्यूटर स्क्रीन पर नकली वायरस और सिक्योरिटी अलर्ट भेजते थे। स्क्रीन पर माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनियों के नाम दिखाए जाते थे ताकि लोग आसानी से भरोसा कर लें।
इसके बाद आरोपी खुद को टेक्निकल सपोर्ट अधिकारी बताकर लोगों से संपर्क करते और उन्हें AnyDesk तथा UltraViewer जैसे रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करवाते थे। जैसे ही ऐप इंस्टॉल होती, आरोपी पीड़ित के सिस्टम का पूरा कंट्रोल अपने हाथ में ले लेते थे।
फिर बैंकिंग डिटेल्स, पासवर्ड और निजी जानकारी हासिल कर लोगों से हजारों डॉलर की ठगी की जाती थी। पुलिस के अनुसार कई मामलों में लोगों को यह कहकर डराया जाता था कि उनके सिस्टम में गैरकानूनी कंटेंट मिला है या बैंक अकाउंट ब्लॉक होने वाला है।
करोड़ों की नकदी और लग्जरी गाड़ियां बरामद
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान करीब 1 करोड़ रुपए से अधिक नकदी, 98 लैपटॉप, 229 मोबाइल फोन और कई लग्जरी गाड़ियां बरामद की हैं। इसके अलावा सैकड़ों बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं।
जांच एजेंसियों ने कई बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है ताकि आगे पैसों के लेन-देन को रोका जा सके। पुलिस का मानना है कि इस नेटवर्क के जरिए विदेशों से करोड़ों रुपए भारत लाए गए।
प्रोफेशनल कंपनी की तरह चलता था नेटवर्क
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि पूरा नेटवर्क किसी प्रोफेशनल कॉल सेंटर कंपनी की तरह संचालित किया जा रहा था। “ऑपनर टीम” लोगों को जाल में फंसाती थी, जबकि “क्लोजर टीम” पैसों का ट्रांसफर करवाती थी।
हर टीम में कई युवक-युवतियां शामिल थे और उन्हें मोटी सैलरी के साथ इंसेंटिव भी दिया जाता था। सूत्रों के मुताबिक गरीब परिवारों के युवाओं को जल्दी पैसा कमाने का लालच देकर इस नेटवर्क में शामिल किया जाता था।
हवाला और क्रिप्टोकरेंसी कनेक्शन की जांच
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि ठगी से कमाया गया पैसा कहां भेजा गया। शुरुआती जांच में हवाला नेटवर्क और क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल की आशंका जताई गई है।
पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
लोगों से पुलिस की अपील
लुधियाना पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान टेक्निकल सपोर्ट कॉल, लिंक या पॉप-अप अलर्ट पर भरोसा न करें। किसी को भी मोबाइल या कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस न दें। पुलिस ने कहा कि साइबर अपराधी अब बेहद आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए सतर्क रहना बेहद जरूरी है।








