
अवैध खनन और ऑनलाइन धोखाधड़ी के खिलाफ पंजाब पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी माइंस पोर्टल के जरिए करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह जानकारी मनींदर सिंह, एसएसपी रूपनगर ने प्रेस को दी।
एसएसपी ने बताया कि माइंस एंड जियोलॉजी विभाग पंजाब की ओर से सूचना मिली थी कि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से मिलती-जुलती एक नकली वेबसाइट तैयार कर सरकारी रॉयल्टी के नाम पर धोखाधड़ी की जा रही है। आरोपी माइंस एंड जियोलॉजी पंजाब के नाम से फर्जी पोर्टल बनाकर जाली क्यूआर फॉर्म जारी करते थे, जिनके जरिए ट्रांसपोर्टरों और क्रशर संचालकों से पैसे वसूले जा रहे थे।
मामले में थाना नंगल में 14 जनवरी 2026 को एफआईआर दर्ज की गई। जांच के दौरान पुलिस ने सबसे पहले रण कुमार उर्फ राणा नामक ट्रांसपोर्टर को गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर नोनू भल्ला निवासी भरतगढ़, गुरमीत सिंह निवासी सरसा नंगल और पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड खिलेश प्रताप शाही निवासी गोरखपुर को भी गिरफ्तार किया गया। मुख्य आरोपी के कब्जे से लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य अहम डिजिटल सबूत बरामद किए गए हैं।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी लंबे समय से फर्जी क्यूआर कोड के जरिए लोगों को गुमराह कर रहे थे। प्रारंभिक जांच में सरकार को करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान है। इस मामले में बीएनएस की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ आईटी एक्ट 2000 की धाराएं 66, 66(C) और 66(D) के तहत केस दर्ज किया गया है।
एसएसपी मनींदर सिंह ने स्पष्ट किया कि फिलहाल माइंस विभाग के किसी अधिकारी की संलिप्तता सामने नहीं आई है, लेकिन जांच जारी है। पुलिस ने जनता से अपील की है कि माइनिंग से संबंधित किसी भी प्रक्रिया के लिए केवल विभाग के आधिकारिक पोर्टल का ही उपयोग करें और संदिग्ध वेबसाइट या लिंक से सावधान रहें।








