शुभम फिल्लौर, पंजाब — महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर शहर और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। रात से ही मंदिरों में लंबी कतारें लग गईं। जैसे ही घड़ी ने 12 बजाए, शिवालयों में ‘बम-बम भोले’ के जयकारों के साथ भगवान शिव का अभिषेक शुरू हो गया।
फिल्लौर के नजदीक गांव नगर स्थित प्राचीन शिव मंदिर में आधी रात से ही भक्त पहुंचने लगे। श्रद्धालुओं ने दूध, दही, शहद और जल से शिवलिंग का अभिषेक किया। मंदिर परिसर में भक्ति गीतों से माहौल भक्तिमय बना रहा।
राजघाट फिल्लौर में सुबह हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। शिव मंदिर के प्रधान रोजी वसंधराय और उनकी पत्नी सहित कई श्रद्धालुओं ने इसमें भाग लिया। मोहल्ला चौधरियां और नाथा की बिगची स्थित शिव मंदिरों में भी सुबह से ही लंबी कतारें देखी गईं।
पंडित तिवारी ने बताया कि महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को मनाई जाती है। शिव महापुराण के अनुसार, इसी रात भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस दिन को ‘शिव की महान रात्रि’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि इसी अवसर पर भगवान शिव ने तांडव नृत्य किया और ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए। समुद्र मंथन के समय निकले विष को पीकर शिव ने संसार की रक्षा की, इसलिए उन्हें नीलकंठ कहा जाता है।
भक्तों ने व्रत रखकर रात्रि जागरण किया और शिवलिंग पर जल अर्पित कर आशीर्वाद लिया। शहर में कई स्थानों पर लंगर भी लगाए गए। पूरे दिन फिल्लौर शिवमय माहौल में डूबा रहा।








