नीट पेपर लीक विवाद को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा छात्रों की वास्तविक मांग से ध्यान भटकाने की कोशिश है। छात्रों ने फास्ट ट्रैक कोर्ट नहीं, बल्कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी।
केजरीवाल ने कहा कि देश में पहले से कई फास्ट ट्रैक कोर्ट मौजूद हैं, लेकिन अनेक मामलों में वहां भी समय पर सुनवाई नहीं हो पाती। ऐसे में केवल नई घोषणा करने से छात्रों का भरोसा नहीं जीता जा सकता।
‘पेपर लीक रोकने का रोडमैप कहां है?’
अपने बयान में केजरीवाल ने कहा कि सरकार ने ऐसा कोई ठोस कदम या नीति नहीं बताई जिससे छात्रों को यह भरोसा मिले कि भविष्य में NEET या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक नहीं होंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मूल समस्या का समाधान करने के बजाय केवल घोषणाएं कर रही है।
‘धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर चुप क्यों?’
AAP प्रमुख ने सवाल उठाया कि यदि छात्रों की प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की थी, तो प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा मंत्री को बचाने की कोशिश कर रही है।
छात्रों पर कार्रवाई को लेकर भी उठाए सवाल
केजरीवाल ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई का भी उल्लेख करते हुए कहा कि घायल छात्रों के प्रति सरकार ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर सहानुभूति व्यक्त करते हुए कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया।
‘सरकार के पास कोई विजन नहीं’
केजरीवाल ने कहा कि यदि परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार नहीं किए गए तो भविष्य में भी पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आ सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के पास परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने का कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं है।











