पंजाब की सियासत में एक नया विवाद सामने आया है, जहां आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और भुलत्थ हलका इंचार्ज एडवोकेट हरसिमरन सिंह घुम्मण ने कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा और उनके परिवार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। घुम्मण ने दावा किया है कि खैरा के परिवार ने कपूरथला जिले के गांव रामगढ़ में पंचायत की जमीन पर अवैध कब्ज़ा कर रखा है, जिससे गांव के विकास कार्य बाधित हो रहे हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान घुम्मण ने कहा कि यह मामला सिर्फ जमीन कब्ज़े तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पूरे इलाके के विकास पर असर पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायत की जमीन पर कब्ज़ों के कारण सरकार द्वारा मंजूर किए गए खेल मैदान समेत कई विकास प्रोजेक्ट समय पर पूरे नहीं हो सके।
घुम्मण ने दावा किया कि पंजाब सरकार की ग्रामीण विकास योजना के तहत रामगढ़ गांव को भी खेल मैदान के लिए चुना गया था, लेकिन 31 मार्च की तय समयसीमा से पहले जमीन की निशानदेही में रुकावट डाल दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह रुकावट जानबूझकर खैरा और उनके समर्थकों द्वारा पैदा की गई, ताकि कथित कब्ज़े उजागर न हो सकें।
AAP नेता ने पंचायती राज विभाग के दस्तावेज और आरटीआई के जरिए जुटाए गए सबूत पेश करते हुए कहा कि रामगढ़ में करीब 46 एकड़ पंचायत जमीन पर लंबे समय से विवाद चल रहा है। उन्होंने खैरा के रिश्तेदारों के नाम भी सार्वजनिक किए और दावा किया कि सरकारी रिकॉर्ड इन कब्ज़ों की ओर स्पष्ट संकेत करते हैं।
घुम्मण ने एक और गंभीर मुद्दा उठाते हुए गांव के तालाब की जमीन में कथित कमी पर सवाल खड़े किए। उनके अनुसार, सरकारी रिकॉर्ड में तालाब का क्षेत्रफल 24 कनाल दर्ज है, जबकि मौजूदा स्थिति में यह घटकर केवल 9 कनाल रह गया है। उन्होंने सवाल किया कि “बाकी 15 कनाल जमीन कहां गई?” और आरोप लगाया कि इस जमीन पर भी अवैध कब्ज़ा किया गया है।
इस मामले को लेकर घुम्मण ने कांग्रेस को खुली चुनौती देते हुए कहा कि वे खुद सभी दस्तावेज लेकर विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा के पास जाएंगे और उन्हें मीडिया की मौजूदगी में जमीन की लाइव निशानदेही के लिए आमंत्रित करेंगे। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि निशानदेही के दौरान किसी भी किसान की फसल को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। इसके लिए आधुनिक GPS तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। साथ ही, अगर किसी किसान को नुकसान होता है तो वह व्यक्तिगत रूप से चार गुना मुआवज़ा देने को तैयार हैं।
घुम्मण ने खैरा पर तीखा हमला करते हुए कहा कि “जो व्यक्ति अपने गांव का वफादार नहीं रह सका, वह पूरे इलाके का नेतृत्व ईमानदारी से कैसे कर सकता है?” उन्होंने आरोप लगाया कि गांव की सेवा करने के बजाय संसाधनों का दुरुपयोग किया गया है।
AAP नेता ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी पंचायत की जमीन को अवैध कब्ज़ों से मुक्त कराने के लिए प्रतिबद्ध है और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सार्वजनिक संसाधनों का लाभ आम लोगों तक पहुंचे।
उन्होंने मीडिया और स्थानीय लोगों से अपील की कि जब भी निशानदेही की तारीख तय हो, वे इस प्रक्रिया में शामिल होकर पारदर्शिता सुनिश्चित करें।
घुम्मण ने अंत में कहा कि यह मामला केवल रामगढ़ गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे पंजाब में पंचायत जमीनों की सुरक्षा और लोगों के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है। आने वाले दिनों में यह विवाद राज्य की राजनीति में और तूल पकड़ सकता है।








