आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने NEET 2024 पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि जांच एजेंसी अदालत में पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं करती, तो पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का प्रस्ताव केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा।
केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा संसद में पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट संबंधी कानून लाने की घोषणा के कुछ ही समय बाद ऐसी खबर सामने आई कि CBI ने अदालत में कथित मास्टरमाइंड संजीव मुखिया के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं होने की बात कही। उन्होंने इसे सरकार के दावों और कार्रवाई के बीच विरोधाभास बताया।
CBI की कार्रवाई पर उठाए सवाल
केजरीवाल ने कहा कि यदि जिस व्यक्ति को पहले मामले का मुख्य आरोपी बताया गया था, उसके खिलाफ ही पर्याप्त सबूत नहीं हैं, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि मामले का वास्तविक मास्टरमाइंड कौन है। उन्होंने सवाल किया कि यदि जांच एजेंसी प्रभावी तरीके से साक्ष्य पेश नहीं करेगी तो फास्ट ट्रैक कोर्ट बनने से भी न्याय प्रक्रिया पर अपेक्षित असर नहीं पड़ेगा।
युवाओं के भविष्य का मुद्दा बताया
AAP प्रमुख ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है। उन्होंने दावा किया कि सरकार को केवल कानून बनाने की घोषणा करने के बजाय ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
फास्ट ट्रैक कोर्ट की उपयोगिता पर भी टिप्पणी
केजरीवाल ने कहा कि देश में पहले से कई मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट मौजूद हैं, लेकिन कई मामलों में सुनवाई लंबी चलती है। उनका कहना था कि केवल अदालतों की संख्या बढ़ाने से समाधान नहीं होगा, बल्कि निष्पक्ष जांच, मजबूत साक्ष्य और दोषियों के खिलाफ प्रभावी अभियोजन भी उतना ही आवश्यक है।












