पंजाब विधानसभा में मंगलवार को ई-20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र सरकार की ई-20 नीति पर तीखा हमला बोलते हुए इसे आम लोगों, वाहन मालिकों और किसानों के हितों के खिलाफ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने बिना व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन और जनता से राय लिए इस नीति को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
सदन में प्रस्ताव का समर्थन करते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि भारत में इथेनॉल उत्पादन की क्षमता अभी सीमित है, जबकि अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा इथेनॉल उत्पादक देश है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विदेशी हितों को प्राथमिकता देते हुए भारतीय उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है।
पंजाब में 1.25 करोड़ से अधिक वाहन होंगे प्रभावित
हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि पंजाब में परिवहन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार 1,25,88,851 दोपहिया, चारपहिया और व्यावसायिक वाहन पंजीकृत हैं। इसके अलावा पड़ोसी राज्यों से खरीदे गए कई वाहनों का पंजीकरण भी जारी है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में पुरानी गाड़ियों वाले राज्य में ई-20 पेट्रोल लागू होने से लाखों वाहन मालिकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
मरम्मत पर ₹25,000 से ₹50,000 तक का खर्च
वित्त मंत्री ने स्थानीय मैकेनिकों से मिली जानकारी का हवाला देते हुए दावा किया कि ई-20 पेट्रोल के उपयोग से प्रभावित वाहनों की मरम्मत पर ₹25,000 से ₹50,000 तक का खर्च आ सकता है। उन्होंने कहा कि यदि डिलीवरी एजेंट, छोटे व्यापारी और रोज़गार के लिए वाहन चलाने वाले लोगों की गाड़ियां बार-बार खराब होंगी तो उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा।
माइलेज घटने का भी लगाया आरोप
चीमा ने कहा कि ई-20 मिश्रित ईंधन से वाहनों के माइलेज में कमी आने की बात पहले भी उठ चुकी है। उन्होंने दावा किया कि इस नीति से वाहन मालिकों पर ईंधन का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा और आम उपभोक्ता को इसका सीधा नुकसान उठाना पड़ेगा।
भूजल संकट पर भी जताई चिंता
वित्त मंत्री ने कहा कि इथेनॉल उत्पादन में बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। पंजाब पहले से ही गिरते भूजल स्तर की गंभीर समस्या से जूझ रहा है और ऐसे में इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने की नीति राज्य के जल संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है।
राष्ट्रीय स्तर पर बहस की मांग
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि ई-20 पेट्रोल को लेकर देशभर में व्यापक बहस की आवश्यकता है। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में आयोजित एक सार्वजनिक संवाद में हजारों लोगों ने भाग लिया और लाखों लोगों ने ऑनलाइन इस विषय पर अपनी राय रखी। उनके अनुसार विभिन्न राज्यों के मैकेनिकों और विशेषज्ञों ने भी इस नीति के संभावित दुष्प्रभावों को लेकर चिंता जताई है।
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि ई-20 नीति को लागू करने से पहले वाहन निर्माताओं, वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों, राज्यों और आम जनता से व्यापक विचार-विमर्श किया जाए ताकि उपभोक्ताओं पर किसी प्रकार का अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।












