कनाडा सरकार द्वारा लागू किए गए नए इमिग्रेशन कानून के बाद वहां रह रहे हजारों विदेशी नागरिकों, खासकर पंजाबी युवाओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जानकारी के मुताबिक, नए C-12 बिल के लागू होने के बाद इमिग्रेशन विभाग ने करीब 30 हजार लोगों को नोटिस जारी किए हैं। इनमें लगभग 9 हजार पंजाबी स्टूडेंट्स और वर्कर्स शामिल हैं, जो वर्क परमिट खत्म होने के बाद शरणार्थी के रूप में कनाडा में रह रहे थे। अब इन पर डिपोर्टेशन की तलवार लटक रही है।
सरकार का कहना है कि यह कदम इमिग्रेशन सिस्टम के दुरुपयोग को रोकने और केवल वास्तविक जरूरतमंदों को ही शरण देने के उद्देश्य से उठाया गया है। नए नियमों के तहत वर्ष 2025 से सख्ती लागू की गई है, जिसके दायरे में वे लोग भी आ गए हैं जो पहले से कनाडा में रहकर काम कर रहे थे।
छात्रों में आक्रोश, सड़कों पर प्रदर्शन
इस फैसले के विरोध में पंजाबी स्टूडेंट्स समेत कई देशों के छात्रों ने कनाडा के शहर विनिपेग में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अचानक नियमों में बदलाव से हजारों युवाओं का भविष्य खतरे में पड़ गया है। उनका कहना है कि उन्होंने पढ़ाई और करियर के लिए भारी निवेश किया था, लेकिन अब उनके सामने अनिश्चितता की स्थिति बन गई है।
शरण प्रक्रिया हुई सख्त
नए कानून के तहत शरण (Asylum) के नियमों को काफी सख्त कर दिया गया है। अब किसी भी व्यक्ति को कनाडा आने के एक साल के भीतर ही शरण के लिए आवेदन करना होगा। यदि आवेदन में देरी होती है तो उसे अयोग्य माना जाएगा, जब तक कि आवेदक इसके पीछे ठोस कारण और प्रमाण न पेश कर सके।
जिन लोगों को नोटिस जारी किया गया है, उन्हें 21 दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा। विशेषज्ञों की सलाह है कि प्रभावित लोग किसी इमिग्रेशन वकील से सलाह लेकर ही जवाब दें, ताकि उनके केस को मजबूत तरीके से प्रस्तुत किया जा सके।
90 दिन का कानूनी विकल्प
अगर कोई व्यक्ति समय पर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाता, तो उसे 90 दिनों के भीतर कानूनी मदद लेने का अवसर दिया जाएगा। इसके अलावा, “प्री-रिमूवल रिस्क असेसमेंट” (PRRA) का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा, जिसके तहत यह जांच की जाएगी कि संबंधित व्यक्ति को उसके देश वापस भेजना सुरक्षित है या नहीं।
PR और वीजा धारकों को राहत
जिन लोगों के पास वैध वीजा या स्थायी निवास (PR) है, उनके लिए स्थिति कुछ हद तक राहत भरी है। ऐसे लोग कानूनी तरीके से अपने स्टेटस को सुरक्षित रख सकते हैं। हालांकि, केवल वीजा न मिलने के आधार पर शरणार्थी का दावा अब मान्य नहीं होगा।
स्वेच्छा से लौटने पर मिल सकता है मौका
कनाडा सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों को नोटिस मिला है, यदि वे स्वेच्छा से देश छोड़ देते हैं तो भविष्य में दोबारा कनाडा आने का अवसर मिल सकता है। लेकिन यदि उन्हें जबरन डिपोर्ट किया जाता है, तो उन पर स्थायी प्रतिबंध (बैन) लग सकता है।
सरकार का पक्ष
कनाडा के इमिग्रेशन मंत्री मार्क मिलर ने इस फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि यह बदलाव इमिग्रेशन सिस्टम को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब शरणार्थी का दर्जा केवल उन्हीं लोगों को मिलेगा, जो युद्ध, हिंसा या उत्पीड़न जैसी गंभीर परिस्थितियों से प्रभावित हैं।
सरकार का यह भी कहना है कि भारत, मेक्सिको और नाइजीरिया सहित कई देशों के नागरिक वीजा नियमों का उल्लंघन कर कनाडा में रह रहे थे, जिसे रोकना आवश्यक था।
विशेषज्ञों की राय
इमिग्रेशन विशेषज्ञों का मानना है कि नए नियमों के बाद कनाडा में शरण के आधार पर रुकने का रास्ता लगभग बंद हो गया है। समय सीमा और पात्रता मानकों को सख्ती से लागू किया जाएगा, जिससे हजारों विदेशी नागरिकों पर सीधा असर पड़ेगा।







