
मनरेगा की जगह लाए गए ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ कानून को लेकर मंगलवार को पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में तीखी बहस देखने को मिली। इस दौरान मनरेगा को यथावत जारी रखने और केंद्र सरकार द्वारा किए गए बदलावों के विरोध में लाया गया प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस अवसर पर भाजपा-नीत केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मनरेगा को खत्म कर दलितों, गरीबों और मजदूरों से रोजगार की कानूनी गारंटी छीनी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भाजपा की केंद्र सरकार को नया कानून तुरंत वापस लेना चाहिए और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को उसी मूल स्वरूप में बहाल करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस “पाप” में अकाली दल भी भाजपा के साथ खड़ा है, इसी कारण वह मनरेगा खत्म किए जाने पर चुप्पी साधे हुए है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि आम आदमी पार्टी दलितों और मजदूरों की आवाज बनेगी और उनकी पीड़ा प्रधानमंत्री तक पहुंचाएगी।
मनरेगा की आत्मा पर हमला
विशेष सत्र के दौरान बोलते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि केंद्र सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर उसकी मूल भावना और संवैधानिक उद्देश्य को ही समाप्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि मनरेगा एक मांग-आधारित योजना थी, जिसमें हर जरूरतमंद परिवार को 100 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी थी, लेकिन नए कानून के तहत यह अधिकार ही समाप्त कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि मनरेगा को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने वर्षों के गहन विचार-विमर्श के बाद लागू किया था, जबकि ‘विकसित भारत जी-राम-जी’ कानून को संसद में मात्र कुछ घंटों में पारित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इससे यह स्पष्ट है कि केंद्र सरकार को न तो गरीबों की चिंता है और न ही संघीय ढांचे की परवाह।
महिलाएं और अनुसूचित जातियां सबसे ज्यादा प्रभावित
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि पिछले वित्त वर्ष में पंजाब में मनरेगा के तहत महिलाओं की भागीदारी करीब 60 प्रतिशत और अनुसूचित जातियों की भागीदारी लगभग 70 प्रतिशत रही। इससे साफ है कि इस योजना का सबसे अधिक लाभ समाज के हाशिए पर खड़े वर्गों को मिल रहा था।
उन्होंने चेतावनी दी कि नए कानून के लागू होने से इन वर्गों की आर्थिक स्थिति और अधिक कमजोर होगी, क्योंकि रोजगार के अवसर सीमित हो जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम सामाजिक न्याय के खिलाफ है और इससे असमानता और गरीबी और बढ़ेगी।
राज्यों पर डाला गया अतिरिक्त वित्तीय बोझ
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने इस नए कानून के जरिए न केवल रोजगार की गारंटी छीनी है, बल्कि राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी डाल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार गरीब-हितैषी योजनाओं में कटौती कर रही है, जबकि चहेते उद्योगपतियों को सब्सिडी और रियायतें दी जा रही हैं।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि एक तरफ “नीली आंखों वाले उद्योगपतियों” को लाभ पहुंचाया जा रहा है और दूसरी तरफ गरीबों के भोजन और काम के अधिकार छीने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि ऐसे हालात में भारत कैसे “विश्वगुरु” या “विकसित भारत” बन सकता है।
‘पंजाब-विरोधी सिंड्रोम’ का आरोप
भगवंत मान ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार ‘पंजाब-विरोधी सिंड्रोम’ से ग्रसित है और इसी कारण लगातार पंजाब के खिलाफ फैसले ले रही है। उन्होंने चंडीगढ़, पंजाब विश्वविद्यालय, भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड और अन्य मुद्दों का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र सरकार हर मोर्चे पर पंजाब के अधिकारों को कमजोर कर रही है।
उन्होंने कहा कि यदि भाजपा की मनमानी चलती रही, तो वह राष्ट्रीय गान से भी पंजाब का नाम हटाने में देर नहीं लगाएगी। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पहले अग्निवीर योजना के जरिए अनुसूचित जाति के युवाओं से सेना में स्थायी अवसर छीने गए और अब इस नए कानून के जरिए उनकी रोज़ी-रोटी पर हमला किया जा रहा है।
अकाली दल और कांग्रेस पर भी निशाना
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अकाली दल की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा नेताओं द्वारा गुरु साहिबानों के कार्टून सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के बावजूद अकाली नेतृत्व मौन क्यों है। उन्होंने आरोप लगाया कि अकाली दल विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा से गठबंधन की उम्मीद में हर मुद्दे पर आंख मूंदे बैठा है।
कांग्रेस पर हमला करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इस मुद्दे पर बहस से भागकर अपनी गरीब-विरोधी मानसिकता और भाजपा से मिलीभगत को उजागर कर रही है। उन्होंने कांग्रेस से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की कि वह नए कानून के पक्ष में है या विपक्ष में।
राज्य सरकार की जन-हितैषी पहलें
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित जाति वर्ग के लिए उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि एजी कार्यालय में अनुसूचित जाति के वकीलों के लिए आरक्षण दिया गया है और अमृतसर व पटियाला की फ्लाइंग स्कूलों में अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए सीटें आरक्षित की गई हैं।
उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार जनता की “ए-टीम” है और राज्य व लोगों के हित में हर जरूरी कदम उठाएगी। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि यदि जन-विरोधी फैसले जारी रहे, तो जनता उन्हें गांवों में घुसने नहीं देगी।
संघर्ष जारी रहेगा
अंत में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि यह कानून अनुसूचित जातियों और गरीब वर्ग की गरिमा व आत्मसम्मान पर सीधा हमला है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि पंजाब सरकार इस बिल का दांत-नाखून से विरोध करेगी और केंद्र सरकार की “नापाक मंशा” को सफल नहीं होने देगी।








