पंजाब सरकार और सफाई कर्मचारियों की यूनियनों के बीच सफल बातचीत के बाद राज्यभर में चल रही सफाई कर्मचारियों की हड़ताल वापस ले ली गई है। पंजाब के वित्त मंत्री Harpal Singh Cheema ने यह जानकारी देते हुए कहा कि भगवंत मान सरकार कर्मचारियों की लंबित मांगों के समाधान के लिए एक कमेटी गठित करेगी, जो एक महीने के भीतर रिपोर्ट तैयार करेगी।
गुरुवार को यूनियन प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि 35 सदस्यीय कमेटी के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने कैबिनेट मंत्री Harjot Singh Bains, वरिष्ठ अधिकारियों और सरकार के साथ कर्मचारियों की मांगों पर विस्तार से चर्चा की।
कई मांगों पर बनी सहमति
वित्त मंत्री ने कहा कि बातचीत के दौरान कई मांगों का समाधान निकाल लिया गया है, जबकि कुछ मुद्दे कानूनी प्रक्रियाओं और चुनाव आचार संहिता से जुड़े होने के कारण अभी विचाराधीन हैं। उन्होंने बताया कि सरकार और यूनियन प्रतिनिधियों ने मिलकर एक संयुक्त कमेटी बनाने का फैसला किया है, जो सभी लंबित मामलों का स्थायी और व्यावहारिक हल निकालेगी।
उन्होंने कहा कि सरकार ने शेष मांगों के समाधान के लिए एक महीने की समय-सीमा तय की है और यूनियनों ने भी सरकार को समय देने पर सहमति जताई है।
भगवंत मान पर बयान को बताया पंजाब का अपमान
केंद्रीय मंत्री Ravneet Singh Bittu द्वारा मुख्यमंत्री Bhagwant Mann को “ISI एजेंट” कहने पर हरपाल सिंह चीमा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि यह बयान सिर्फ मुख्यमंत्री का नहीं बल्कि 3 करोड़ पंजाबियों और उनके जनादेश का अपमान है। चीमा ने आरोप लगाया कि भाजपा हमेशा से पंजाब विरोधी मानसिकता दिखाती रही है।
अरूसा आलम मुद्दे पर भाजपा को घेरा
Harpal Singh Cheema ने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान जब Aroosa Alam को लेकर सवाल उठ रहे थे और तत्कालीन मुख्यमंत्री Amarinder Singh के सरकारी आवास में उनकी मौजूदगी पर चर्चा हो रही थी, तब भाजपा नेताओं ने चुप्पी क्यों साध रखी थी।
उन्होंने सवाल किया कि अगर भाजपा नेताओं को राष्ट्रीय सुरक्षा की इतनी चिंता थी तो उस समय कोई आवाज क्यों नहीं उठाई गई।
“लोकतंत्र में हर किसी को बोलने का अधिकार”
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ से जुड़े सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र और संविधान हर नागरिक को राजनीतिक दल बनाने और अपने विचार रखने का अधिकार देता है।
उन्होंने कहा कि युवाओं, छात्रों और सामाजिक समूहों की आवाज को दबाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए चीमा ने आरोप लगाया कि देश में असहमति की आवाजों को दबाने और लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति को सीमित करने की कोशिश की जा रही है।








