ज़िंदगी कभी-कभी ऐसे मोड़ पर ला खड़ी करती है, जहां कुछ सेकंड ही जीवन और मौत के बीच की दूरी तय करते हैं। 62 वर्षीय भूर कौर के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ, जब अचानक उनका ब्लड शुगर लेवल 550 mg/dL तक पहुंच गया और देखते ही देखते वह बेहोश होकर गिर पड़ीं। परिवार के लिए यह किसी बड़े सदमे से कम नहीं था।
पिछले 15-16 वर्षों से डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहीं भूर कौर की हालत अचानक इतनी बिगड़ जाएगी, इसका अंदाज़ा किसी को नहीं था। घरवालों ने बिना समय गंवाए उन्हें तुरंत सुनाम स्थित कश्मीरी हार्ट केयर सेंटर पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उनकी हालत बेहद गंभीर बताई।
मौत और जिंदगी के बीच चल रही थी जंग
Dr. Anshuman Phull ने बताया कि भूर कौर को डायबिटिक कीटोएसिडोसिस, गंभीर संक्रमण और एक्यूट रेस्पिरेटरी फेल्योर जैसी खतरनाक स्थिति में अस्पताल लाया गया था। उनका ऑक्सीजन लेवल लगातार गिर रहा था और शरीर मेटाबॉलिक असंतुलन की गंभीर स्थिति में पहुंच चुका था।
डॉक्टरों के अनुसार, हाई ब्लड शुगर के कारण शरीर में पानी की भारी कमी, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन और कई अंगों पर दबाव बढ़ गया था। इसके साथ ही उन्हें सेप्सिस भी हो गया था, जिसमें संक्रमण शरीर को ही नुकसान पहुंचाने लगता है।
डॉ. अंशुमन फुल ने कहा कि ऐसे मामलों में हर मिनट बेहद अहम होता है। थोड़ी सी देरी भी मरीज की जान पर भारी पड़ सकती है।
ICU में चला लगातार इलाज
आईसीयू में भूर कौर को ऑक्सीजन सपोर्ट, IV इंसुलिन, एंटीबायोटिक्स, फ्लूइड्स और लगातार मॉनिटरिंग पर रखा गया। डॉक्टरों की टीम एक साथ कई गंभीर समस्याओं से जूझ रही थी। परिवार ICU के बाहर दुआओं और उम्मीद के सहारे बैठा रहा।
तीसरे दिन इलाज का असर दिखना शुरू हुआ। ऑक्सीजन लेवल बेहतर हुआ, संक्रमण कम होने लगा और सबसे बड़ी राहत तब मिली जब भूर कौर को होश आ गया। डॉक्टरों ने इसे “मौत के मुंह से वापसी” जैसा पल बताया।
‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ बनी सहारा
इस पूरे इलाज के दौरान पंजाब सरकार की Mukhyamantri Sehat Yojana ने अहम भूमिका निभाई। डॉक्टरों के मुताबिक योजना के तहत इलाज कवर होने के कारण ICU और इमरजेंसी ट्रीटमेंट तुरंत शुरू किया जा सका।
डॉ. फुल ने कहा कि मेडिकल इमरजेंसी में आर्थिक देरी कई बार जानलेवा साबित होती है, लेकिन इस योजना ने बिना किसी रुकावट के तुरंत इलाज सुनिश्चित किया।
“मुझे दूसरा जीवन मिला”
अब धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहीं भूर कौर ने भावुक होकर कहा कि उन्हें सब कुछ याद नहीं, लेकिन इतना जरूर पता है कि उनकी हालत बेहद गंभीर थी। उन्होंने डॉक्टरों और सरकार का धन्यवाद करते हुए कहा कि सेहत कार्ड की वजह से आज वह जिंदा हैं।
वहीं उनके बेटे हरपाल और बहू परमजीत ने भी समय पर मिले इलाज और डॉक्टरों की मेहनत के लिए आभार जताया। परिवार का कहना है कि यह अनुभव उनकी जिंदगी का सबसे कठिन दौर था।
सिर्फ इलाज नहीं, उम्मीद की कहानी
भूर कौर की कहानी केवल एक मेडिकल इमरजेंसी नहीं, बल्कि समय पर इलाज, परिवार के विश्वास और स्वास्थ्य व्यवस्था के सहयोग की मिसाल बन गई है। यह घटना बताती है कि गंभीर बीमारी बिना चेतावनी के आ सकती है, लेकिन सही समय पर उपचार मिलने से जिंदगी को फिर से बचाया जा सकता है।








