पंजाब की राजनीति में जारी दल-बदल विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सभी विधायकों के साथ राष्ट्रपति से मुलाकात कर कथित तौर पर पार्टी बदलने वाले राज्यसभा सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग उठाई है।
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति भवन में सभी विधायकों के हस्ताक्षर वाला ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि पंजाब में भाजपा के केवल दो विधायक होने के बावजूद राज्यसभा सांसदों की संख्या का बढ़ना लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने इन सांसदों को “इलेक्टेड नहीं, बल्कि सेलेक्टेड” बताते हुए उनके कदम को पंजाब के साथ विश्वासघात करार दिया।
⚖️ इस्तीफा देकर चुनाव लड़ने की चुनौती
मुख्यमंत्री मान ने कहा कि अगर इन सांसदों में वास्तव में जनभावना का सम्मान है, तो उन्हें तत्काल इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है।
🔍 ‘ऑपरेशन लोटस’ पर निशाना
मान ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘ऑपरेशन लोटस’ जैसी रणनीतियां पंजाब में कभी सफल नहीं होंगी। उन्होंने कहा कि पंजाबी जनता विश्वासघात को बर्दाश्त नहीं करती और ऐसे नेताओं को जवाब जरूर देगी।
📢 सोशल मीडिया पर भी उठाई आवाज
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि देश में लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला हो रहा है और उनकी सरकार जनादेश की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी।







