चंडीगढ़, 24 फरवरी: पंजाब में नशे के खिलाफ चल रही ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ मुहिम को लेकर राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि सरकार की सख्त कार्रवाई से ड्रग तस्करों के नेटवर्क पर गहरी चोट लगी है और कई गिरोहों की कमर टूट चुकी है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में चीमा ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में 2022 से नशे के खिलाफ अभियान को जन आंदोलन का रूप दिया गया। विशेष सब-कमेटी का गठन किया गया, जिलों में लगातार बैठकें हुईं और गांव स्तर पर सुरक्षा समितियों को सक्रिय किया गया। सरकार के अनुसार 1.5 लाख से अधिक लोगों ने नशा विरोधी शपथ लेकर इस मुहिम का साथ दिया है।
चीमा ने आरोप लगाया कि पंजाब में सख्ती बढ़ने के बाद तस्कर हरियाणा की ओर रुख कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब एक राज्य में कानून मजबूत होता है तो अपराधी दूसरे रास्ते खोजते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के बार-बार पंजाब आने पर सवाल उठाए और कहा कि लोगों के मन में कई सवाल हैं, जिनका जवाब मिलना चाहिए।
उन्होंने 2007 से 2017 के अकाली-भाजपा शासन का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय पंजाब ने नशे की बड़ी समस्या झेली थी। उनका कहना था कि मौजूदा सरकार उस दौर को दोहराने नहीं देगी।
चीमा ने हरियाणा के पुलिस अधिकारी सुनील संधू का नाम लेते हुए कहा कि यदि कोई अधिकारी नशे के खिलाफ कार्रवाई करता है तो उसे संरक्षण मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईमानदारी से काम करने वालों को डराया नहीं जाना चाहिए।
इसके अलावा उन्होंने भाजपा शासित गुजरात में 3,000 किलो हेरोइन की जब्ती का हवाला देते हुए कहा कि इतनी बड़ी बरामदगी पूरे देश के लिए चिंता का विषय है। ड्रग नेटवर्क के खिलाफ सख्त और एकजुट कार्रवाई की जरूरत है।
अंत में चीमा ने दोहराया कि पंजाब सरकार नशा माफिया को दोबारा पैर नहीं जमाने देगी। उन्होंने कहा कि युवाओं का भविष्य सुरक्षित रखना सरकार की पहली जिम्मेदारी है और यह अभियान लगातार जारी रहेगा।









