
शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और बच्चों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का संदेश देते हुए पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस और दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री तथा आम आदमी पार्टी के पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने वैदिक शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। यह विचार बीसीएम स्कूल, लुधियाना में आयोजित वैदिक भाषण प्रतियोगिता और पुरस्कार समारोह के दौरान सामने आए।
सनातन सेवा समिति पंजाब और वेद प्रचार मंडल पंजाब के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में शिक्षा जगत से जुड़े कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में 25 स्कूलों के 296 विद्यार्थियों ने भाग लेकर वेद, उपनिषद, रामायण और गीता जैसे विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। समारोह में विजेता विद्यार्थियों और भाग लेने वाले स्कूलों के प्रिंसिपलों को सम्मानित किया गया।
समारोह को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि शिक्षा के जरिए ही समाज में स्थायी परिवर्तन संभव है। उन्होंने कहा कि जिस तरह का राज्य और देश हम भविष्य में देखना चाहते हैं, उसी अनुरूप सिद्धांत और मूल्य बच्चों को शिक्षा के माध्यम से दिए जाने चाहिए। उन्होंने शिक्षकों की सराहना करते हुए कहा कि वे बच्चों को न सिर्फ आधुनिक ज्ञान दे रहे हैं, बल्कि उन्हें अपनी विरासत और संस्कारों से भी जोड़ रहे हैं।
हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि भले ही आज दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार नहीं है, लेकिन दिल्ली के सरकारी स्कूलों में मनीष सिसोदिया द्वारा तैयार किया गया शिक्षा मॉडल पूरे देश के लिए प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि जब पौधा छोटा होता है, तब उसे सही दिशा दी जा सकती है। उसी तरह बच्चों को शुरुआती उम्र में मजबूत और मूल्य आधारित शिक्षा देकर उनका भविष्य संवारा जा सकता है।
दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अपने संबोधन में कहा कि वे एक दशक से अधिक समय से शिक्षा और राजनीति से जुड़े हैं, लेकिन इस तरह के कार्यक्रम बहुत कम देखने को मिलते हैं। उन्होंने इस पहल का श्रेय सनातन सेवा समिति पंजाब, वेद प्रचार मंडल पंजाब, बीसीएम स्कूल प्रबंधन, शिक्षकों और विद्यार्थियों को दिया।
सिसोदिया ने कहा कि वेद, उपनिषद, रामायण और गीता जैसे ग्रंथ केवल धार्मिक किताबें नहीं हैं, बल्कि जीवन जीने की वैज्ञानिक और व्यावहारिक दृष्टि भी प्रदान करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे इस ज्ञान को पढ़ें, समझें और अपने जीवन में उतारें। उन्होंने कहा कि यह पहल बीसीएम स्कूल तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पूरे पंजाब के स्कूलों में वैदिक शिक्षा को स्थान मिलना चाहिए।
उन्होंने आधुनिक विज्ञान और प्राचीन ज्ञान की तुलना करते हुए कहा कि आज दुनिया वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में बैठकर ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने की कोशिश कर रही है। इलेक्ट्रॉन, न्यूट्रॉन और ऊर्जा के सिद्धांतों पर जो खोजें हो रही हैं, उनका उल्लेख हमारे ऋषि-मुनियों ने हजारों साल पहले कर दिया था। उन्होंने कहा कि हमारे गुरुओं ने ध्यान और आत्मचिंतन के जरिए यह समझ लिया था कि यह संसार कंपन और ऊर्जा से बना है।
मनीष सिसोदिया ने कहा कि यदि हमारे बच्चे वेद, उपनिषद, रामायण और गीता के ज्ञान से होकर आधुनिक विज्ञान की ओर बढ़ेंगे, तो वे न केवल अच्छे वैज्ञानिक बनेंगे, बल्कि बेहतर इंसान भी बनेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि आज के सोशल मीडिया युग में बच्चों के दिमाग में अनावश्यक जानकारी और नकारात्मकता भर जाती है, जिसे वैदिक और आध्यात्मिक साहित्य के माध्यम से साफ किया जा सकता है।
इस अवसर पर सनातन सेवा समिति पंजाब के अध्यक्ष विजय शर्मा और वेद प्रचार मंडल पंजाब के अध्यक्ष रोशन लाल आर्य ने भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि बीते एक वर्ष से बच्चों को संस्कृति और वेदों से जोड़ने के उद्देश्य से भाषण प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है, जिसका सकारात्मक असर विद्यार्थियों पर साफ दिखाई दे रहा है। समारोह के अंत में विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कार और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने आगामी केंद्रीय बजट को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब की मांगों को देश के गृह मंत्री अमित शाह के समक्ष मजबूती से उठाया है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष ऑपरेशन संदूर और बाढ़ के कारण पंजाब को भारी नुकसान हुआ, इसलिए राज्य को विशेष राहत पैकेज दिया जाना चाहिए।
हरजोत सिंह बैंस ने यह भी मांग की कि केंद्र सरकार शिक्षा के लिए बजट बढ़ाए। उन्होंने कहा कि यदि भारत को सचमुच विश्व शक्ति बनाना है, तो शिक्षा पर निवेश बढ़ाना होगा। केवल एक या डेढ़ प्रतिशत बजट से स्कूल, कॉलेज और शोध संस्थानों को मजबूत नहीं किया जा सकता। कम से कम 10 प्रतिशत बजट शिक्षा प्रणाली के लिए तय होना चाहिए।
समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस कार्यक्रम ने न सिर्फ विद्यार्थियों को प्रेरित किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ वैदिक ज्ञान को जोड़कर ही संतुलित और सशक्त भविष्य का निर्माण किया जा सकता है।











