
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा है कि राज्य में इस बार पराली जलाने के मामलों में रिकॉर्ड कमी दर्ज की गई है, लेकिन इसके बावजूद भाजपा और कुछ विरोधी ताकतें योजनाबद्ध साजिश के तहत पंजाब को बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दिल्ली-एनसीआर का बढ़ता प्रदूषण पंजाब के किसानों की वजह से नहीं, बल्कि राजनीतिक एजेंडे और नीतिगत असंतुलन का नतीजा है।
🔹 चुनाव आयोग से पारदर्शिता की मांग
मुख्यमंत्री मान ने चुनाव आयोग से आग्रह किया कि मतदाता सूचियों की विशेष जांच (Special Intensive Revision) को लेकर उठे संदेहों को दूर किया जाए।
उन्होंने कहा कि आयोग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसकी कार्रवाइयों से ऐसा संदेश न जाए कि वह “वोट चोरी” के मकसद से लोकतंत्र की आवाज दबा रहा है।
भगवंत मान बोले — “चुनाव आयोग को विपक्षी दलों की आपत्तियों पर पारदर्शी स्पष्टीकरण देना चाहिए, ताकि लोकतंत्र में जनता का विश्वास और मजबूत हो।”
🔹 “हरियाणा बीच में है, फिर भी दोष पंजाब पर क्यों?”
मान ने कहा कि दिल्ली के खराब AQI के लिए हमेशा पंजाब को जिम्मेदार ठहराना राजनीतिक दुष्प्रचार है।
उन्होंने बताया कि इस वक्त करीब 90 लाख मीट्रिक टन धान अभी भी मंडियों में पहुंचना बाकी है, इसलिए पराली जलाने का सवाल ही नहीं उठता।
उन्होंने सवाल उठाया —
“जब हरियाणा पंजाब और दिल्ली के बीच में है, तो फिर हमेशा केवल पंजाब को ही क्यों दोषी ठहराया जाता है?”
🔹 केंद्र सरकार के रवैये पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर पंजाब के साथ “सौतेला व्यवहार” करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि बाढ़ से भारी तबाही के बावजूद केंद्र ने प्रधानमंत्री राहत कोष से घोषित 1600 करोड़ रुपये की राशि अब तक जारी नहीं की।
इसके विपरीत, केंद्र इन फंड्स को अन्य योजनाओं से समायोजित (adjust) करने की कोशिश कर रहा है, जिससे पंजाब की आर्थिक स्थिति और बिगड़ रही है।
भगवंत मान ने कहा —
“पंजाब देश का अन्न भंडार है, सीमा की रक्षा करने वाला प्रदेश है, लेकिन केंद्र सरकार ने हमेशा इसे राजनीतिक नजरिए से देखा है।”
🔹 प्रधानमंत्री से मुलाकात पर बोले मान
मान ने बताया कि उन्होंने कई बार प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांगा,
“लेकिन वे बिहार चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि वे श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस समारोह में प्रधानमंत्री को आमंत्रित करना चाहते हैं और साथ ही पंजाब के बाढ़ प्रभावित इलाकों का मुद्दा उनके सामने उठाना चाहते हैं।
उन्होंने व्यंग्य भरे लहजे में कहा कि अगर जरूरत पड़ी, तो वे खुद बिहार जाकर प्रधानमंत्री से मिलने को तैयार हैं।
🔹 नशा मुक्त और स्वच्छ पंजाब की दिशा में मान सरकार के प्रयास
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार पंजाब को नशा मुक्त, स्वच्छ और हरित बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है।
उन्होंने कहा कि जनता और सरकार के सहयोग से “पंजाब को बदनाम करने वालों को करारा जवाब मिलेगा।”









