
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने मंगलवार को केंद्र सरकार से अपील की है कि वह पंजाब और हरियाणा के बीच दशकों पुराने सतलुज-यमुना लिंक (SYL) विवाद का समाधान निकालने के लिए चिनाब नदी के पानी का उपयोग करे।
मुख्यमंत्री ने यह प्रस्ताव केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान रखा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने 9 जुलाई को हुई पिछली बैठक में बताया था कि इंडस वॉटर ट्रीटी को निलंबित कर दिया गया है। इस कदम से पाकिस्तान को मिलने वाले पश्चिमी नदियों के जल का भारत अब प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “अब केंद्र को रणजीत सागर, पौंग या भाखड़ा जैसे बांधों के ज़रिए चिनाब का पानी पंजाब में लाना चाहिए। इसके लिए जरूरी नहरों और ढांचे का निर्माण पंजाब में किया जा सकता है। इससे पहले पंजाब की जल ज़रूरतें पूरी होंगी और फिर हरियाणा-राजस्थान को अतिरिक्त पानी दिया जा सकता है।”
🔹 पंजाब के भूजल संकट का मिलेगा समाधान
मुख्यमंत्री ने कहा कि चिनाब के पानी का उपयोग पंजाब के गिरते भूजल स्तर को बचाने में मदद करेगा। वर्तमान में पंजाब के 153 में से 115 ब्लॉक ओवरएक्सप्लॉइटेड घोषित किए जा चुके हैं। भूजल पर अत्यधिक निर्भरता ने राज्य की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को खतरे में डाल दिया है।
🔹 शारदा-यमुना लिंक व रोहतांग टनल के सुझाव
मुख्यमंत्री ने वैकल्पिक समाधान के तौर पर शारदा-यमुना लिंक प्रोजेक्ट को प्राथमिकता देने और चिनाब के पानी को रोहतांग टनल के माध्यम से ब्यास नदी तक लाने का सुझाव दिया। इससे न केवल हरियाणा, बल्कि दिल्ली और राजस्थान की पानी की जरूरतें भी पूरी हो सकेंगी।
🔹 SYL को लेकर गंभीर चेतावनी
भगवंत मान ने SYL को “भावनात्मक और संवेदनशील मुद्दा” बताते हुए कहा कि इसे ज़बरदस्ती थोपने की कोशिश से पंजाब में कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है। उन्होंने साफ कहा कि अब तक SYL के लिए पंजाब में ज़मीन अधिग्रहित नहीं की गई है।
🔹 सांख्यिकी और तथ्य
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पंजाब की कुल पानी की ज़रूरत: 52 MAF
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वर्तमान उपलब्धता: 26.75 MAF (12.46 MAF नदियों से, 14.29 MAF भूजल से)
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पंजाब में ट्यूबवेलों की संख्या 1980 में 6 लाख से बढ़कर 2018 में 14.76 लाख हो चुकी है
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भूजल दोहन की दर पंजाब में 157%, राजस्थान से भी अधिक
🔹 मुआवजे और जल साझेदारी पर सुझाव
मुख्यमंत्री ने यह भी मांग की कि चूंकि पंजाब की नदियों का पानी अन्य राज्यों को जाता है, तो बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं में अन्य राज्यों को पंजाब को मुआवजा देना चाहिए, क्योंकि बाढ़ का नुकसान सिर्फ पंजाब को झेलना पड़ता है।









