
नशे की मार से जूझ रहे पंजाब में अब एक नई शुरुआत हुई है। भगवंत मान सरकार ने एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला लिया है, जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा है। 1 अगस्त से पंजाब के सभी सरकारी स्कूलों में कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों को वैज्ञानिक और व्यवहारिक नशा-रोधी शिक्षा दी जाएगी।
📘 पाठ्यक्रम की खास बातें:
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यह कोर्स नोबेल विजेता प्रो. अभिजीत बनर्जी की टीम द्वारा विकसित किया गया है।
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3,658 सरकारी स्कूलों में 8 लाख छात्र शामिल होंगे।
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6,500 से ज्यादा शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया है।
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27 हफ्ते, हर दो हफ्ते में 35 मिनट की क्लास, जिसमें होंगे:
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डॉक्यूमेंट्री फ़िल्में
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क्विज़, पोस्टर और वर्कशीट
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इंटरेक्टिव सेशन्स और ग्रुप डिस्कशन
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🔍 पायलट प्रोजेक्ट के नतीजे:
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अमृतसर और तरनतारन के 78 स्कूलों में पायलट प्रोग्राम के तहत
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90% छात्रों ने माना कि “एक बार भी चिट्टा लेने से लत लग सकती है”
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“सिर्फ इच्छाशक्ति से नशा छोड़ा जा सकता है” – यह सोच 50% से घटकर 20% रह गई।
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🚨 सिर्फ सज़ा नहीं, अब समझदारी से बदलाव:
मान सरकार की नीति अब सिर्फ नशा तस्करों को पकड़ने तक सीमित नहीं है —
अब जड़ से समाधान, बच्चों की सोच और समझ को मजबूत कर नशे से बचाव करना है।
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मार्च 2025 से अब तक:
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23,000+ तस्कर गिरफ्तार
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1,000 किलो से अधिक हेरोइन जब्त
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कई करोड़ की संपत्ति ज़ब्त
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लेकिन अब सरकार ने ठाना है — “केवल पुलिस कार्रवाई नहीं, अब शिक्षा से समाधान।”
🗣️ मुख्यमंत्री भगवंत मान का संदेश:
“अब लड़ाई थानों से नहीं, क्लासरूम से लड़ी जाएगी। अब हमारा बच्चा खुद कहेगा — मैं नशे से दूर रहूंगा। यही असली सेवा है, यही असली राजनीति है।”
📌 निष्कर्ष:
यह कोर्स सिर्फ एक शैक्षणिक पहल नहीं है, यह सामाजिक क्रांति की शुरुआत है। आने वाले वर्षों में पंजाब का यह मॉडल पूरे देश के लिए एक प्रेरणा बन सकता है









