
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और आम आदमी पार्टी पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की जमानत और डेरा ब्यास मुखी की जेल मुलाकात को लेकर सख्त प्रतिक्रिया दी है। दोनों नेताओं ने साफ शब्दों में कहा कि जमानत मिलने का अर्थ किसी भी मामले में बरी होना नहीं होता।
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि मजीठिया के खिलाफ जांच एजेंसियों के पास ठोस और पुख्ता सबूत मौजूद हैं, जिन्हें अदालत के समक्ष रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि जमानत केवल एक कानूनी प्रक्रिया है और इससे किसी आरोपी को क्लीन चिट नहीं मिल जाती। न्यायिक प्रक्रिया अपने तय रास्ते पर आगे बढ़ेगी और कानून अपना काम करेगा।
वहीं, बलतेज पन्नू ने डेरा ब्यास मुखी की मजीठिया से जेल में हुई मुलाकात पर टिप्पणी करते हुए कहा कि डेरा ब्यास के मुखी समाज में सम्मानित स्थान रखते हैं और उनके अनुयायी देश-विदेश में फैले हुए हैं, लेकिन इतनी बड़ी धार्मिक हस्ती को जेल में किसी आरोपी से मिलने से बचना चाहिए था।
पन्नू ने कहा कि संत-महात्मा आम तौर पर रिश्तों और व्यक्तिगत संबंधों से ऊपर होते हैं। ऐसे में किसी विवादित कानूनी मामले में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल होना उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी धार्मिक या सामाजिक व्यक्ति को न्यायाधीश की भूमिका नहीं निभानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला अदालत के अधीन है और फैसला भी न्यायालय को ही करना चाहिए। अदालती प्रक्रिया पर किसी भी तरह का दबाव या टिप्पणी न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। आम आदमी पार्टी ने दोहराया कि कानून सभी के लिए समान है और किसी भी व्यक्ति को विशेष रियायत नहीं दी जाएगी।










